पंचायत सचिव दिवस पर सेवानिवृत्त सचिवों का सम्मान, शासकीयकरण की मांग फिर हुई बुलंद

खैरागढ़-छुईखदान-गंडई : प्रदेश पंचायत सचिव संघ द्वारा प्रत्येक वर्ष की भांति 7 जुलाई को पंचायत सचिव दिवस (स्थापना दिवस) उत्साहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम में पंचायत सचिव सेवा से सेवानिवृत्त सचिव सुनील झा एवं अमृत लाल साहू को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। इस अवसर पर दोनों सेवानिवृत्त सचिवों का श्रीफल, मोमेंटो एवं शॉल भेंट कर सम्मानपूर्वक विदाई दी गई।

कार्यक्रम के दौरान दिवंगत पंचायत सचिव घनश्याम सोनवानी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उनकी पुत्री मनीषा जोशी तथा दिवंगत सचिव नेमीचंद वर्मा की पत्नी निराशा वर्मा को अनुकंपा नियुक्ति मिलने पर उनका भी सम्मान किया गया।
इस अवसर पर प्रदेश पंचायत सचिव संघ ने पंचायत सचिवों के लंबे संघर्ष, संगठन की उपलब्धियों तथा शासकीयकरण की मांग को प्रमुखता से उठाया। जिलाध्यक्ष लोकेश जंघेल ने कहा कि वर्ष 1995 में ग्राम सभाओं के माध्यम से पंचायत सचिवों की नियुक्ति हुई थी। शुरुआती दौर में पंचायत सचिवों को मात्र 500 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता था, जो वर्ष 2005 तक बढ़कर केवल 1,250 रुपये हुआ। इसके बाद संगठन के लगातार संघर्ष, आंदोलन और प्रयासों के परिणामस्वरूप समय-समय पर मानदेय में वृद्धि होती रही।
उन्होंने बताया कि तत्कालीन सरकारों द्वारा पंचायत सचिवों की समस्याओं के समाधान और मानदेय वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। वर्ष 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा पंचायत सचिवों को वेतनमान का लाभ दिए जाने के बाद वर्तमान में सचिवों को 50 हजार रुपये से अधिक का मासिक वेतन प्राप्त हो रहा है।
संघ ने कहा कि संगठन का सबसे बड़ा लक्ष्य पंचायत सचिवों का शासकीयकरण है। इस मांग को लेकर वर्षों से आंदोलन, ज्ञापन और विभिन्न स्तरों पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। संघ ने विश्वास जताया कि भविष्य में प्रदेश की भाजपा सरकार पंचायत सचिवों की इस प्रमुख मांग पर सकारात्मक निर्णय लेगी।
कार्यक्रम के अंत में प्रदेश पंचायत सचिव संघ ने सभी सचिव साथियों से संगठन की एकजुटता बनाए रखने तथा अपने अधिकारों की लड़ाई को मजबूती से आगे बढ़ाने का आह्वान किया। संघ ने कहा कि संगठन की एकता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है और शासकीयकरण की मांग पूरी होने तक संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।

रिपोर्टर : रवि रजक

 

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