सोलर लाइट और डस्टबिन खरीदी पर उठे सवाल,ग्राम पंचायत जिराटोला में अनियमितता के आरोप

खैरागढ़ - छुईखदान विकासखंड के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत जिराटोला में जनपद निधि से कराए गए सोलर लाइट स्थापना कार्य एवं स्वच्छ भारत अभियान के तहत डस्टबिन खरीदी को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों और सूत्रों के हवाले से वित्तीय अनियमितता की आशंका जताई जा रही है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और मामला जांच का विषय है।

सोलर लाइट स्थापना पर सवाल

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत में जनपद निधि से चार सोलर लाइट लगाए गए हैं, जिनका भुगतान पंचायत के माध्यम से किया गया है। बताया जा रहा है कि प्रत्येक सोलर लाइट का बिल लगभग ₹10,000 के हिसाब से कुल ₹40,000 का भुगतान दर्शाया गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मौके पर लगाए गए जीआई पाइप और सोलर लाइट की वास्तविक लागत इससे कम प्रतीत होती है। वहीं निरीक्षण के दौरान एक स्थान पर केवल खंभा दिखाई देने तथा सोलर लाइट नहीं लगी होने का भी दावा किया जा रहा है। यदि यह तथ्य सही पाए जाते हैं तो इसकी जांच आवश्यक होगी।

 डस्टबिन खरीदी और वितरण पर भी उठे प्रश्न

स्वच्छ भारत अभियान के तहत ग्राम पंचायत द्वारा 500 डस्टबिन खरीदे जाने की जानकारी सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत के आश्रित ग्राम बगदूर में अब तक डस्टबिन का वितरण नहीं किया गया है। सूत्रों के अनुसार,इसी प्रकार के डस्टबिन की खरीदी का एक अन्य पंचायत का बिल ₹92 प्रति डस्टबिन दर्शाता है, जबकि ग्राम पंचायत जिराटोला में कथित रूप से ₹101 प्रति डस्टबिन की दर से खरीदी दिखाई गई है। दावा किया जा रहा है कि दोनों बिल एक ही फर्म और एक ही विक्रेता से संबंधित हैं। यदि दस्तावेजों में यह अंतर सही है, तो इसकी भी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता होगी।

क्या बोले पंचायत प्रतिनिधि

इस संबंध में सरपंच प्रतिनिधि केशलाल मंडावी का कहना है कि कार्य जनपद सदस्य निधि से कराया गया है। साथ ही आगे कुछ बताने से बचते नजर आए उनके जवाब से कई बिंदुओं पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी। जबकि पूरे कार्यो का बिल पंचायत स्तर से हुवा है और कार्य एजेंसी भी पंचायत के होने की बात सामने आ रहा। 

जांच की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि यदि सोलर लाइट स्थापना, डस्टबिन खरीदी और वितरण से जुड़े दस्तावेजों एवं स्थल का निष्पक्ष सत्यापन कराया जाए तो पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले की जांच कराता है या नहीं

रिपोर्टर - रमेश कुमार चेलक

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