ख़ामेनेई की हत्या का मिशन: कब, कहां और कैसे बनाया गया टारगेट दिनदहाड़े हुआ हमला, खुफिया मौके का उठाया गया फायदा

ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की मौत वाला हमला आधी रात में नहीं, बल्कि दिन के उजाले में अंजाम दिया गया। बताया गया कि अमेरिका और इसराइल को कुछ घंटे पहले ऐसी अहम खुफिया जानकारी मिली, जिसने इस ऑपरेशन को तुरंत अंजाम देने का मौका दिया। महीनों से दोनों देश ऐसे ही किसी क्षण की तलाश में थे, जब ईरान के शीर्ष राजनीतिक, सैन्य और खुफिया अधिकारी एक साथ मौजूद हों।

सेंट्रल तेहरान में तय लोकेशन, पहले से ट्रैकिंग

खुफिया इनपुट के अनुसार, ख़ामेनेई शनिवार सुबह तेहरान के एक सुरक्षित कंपाउंड में मौजूद रहने वाले थे। उसी समय वहां अन्य वरिष्ठ सैन्य और इंटेलिजेंस अधिकारी भी जुटने वाले थे। अमेरिका और इसराइल महीनों से ख़ामेनेई की गतिविधियों पर नज़र रखे हुए थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बाद में संकेत दिया कि अत्याधुनिक इंटेलिजेंस और ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए उनकी मूवमेंट पर नज़र रखी जा रही थी।

खुफिया जानकारी का स्रोत और तकनीकी निगरानी

माना जा रहा है कि खुफिया जानकारी मानव स्रोत के साथ-साथ तकनीकी निगरानी से भी आई। टेलीकॉम नेटवर्क, मोबाइल फोन सिस्टम और बॉडीगार्ड्स की मूवमेंट को ट्रैक कर लंबे समय में एक “पैटर्न ऑफ लाइफ” तैयार किया गया। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, इस ऑपरेशन के लिए अहम जानकारी सीआईए से मिली, जिसे हमले के लिए इसराइल को साझा किया गया।

दिन में हमला क्यों?

ईरानी सुरक्षा एजेंसियों को अंदेशा था कि दिन के समय हमला होने की संभावना कम है। यही वजह रही कि ऑपरेशन दिन में अंजाम दिया गया। यह या तो ईरानी सुरक्षा तंत्र की बड़ी चूक मानी जा रही है या फिर अमेरिका–इसराइल की बदलती ट्रैकिंग रणनीतियों की सफलता।

मिसाइल और जेट, अंडरग्राउंड बंकर भी निशाने पर

खुफिया जानकारी पहले से होने के कारण लंबी दूरी की मिसाइलें दागने वाले जेट विमानों से हमले की योजना बनाई गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसराइली जेट विमानों ने स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 9:40 बजे कंपाउंड पर करीब 30 बम गिराए। माना गया कि ख़ामेनेई सुरक्षा के लिए अंडरग्राउंड बंकर का इस्तेमाल कर रहे थे, इसलिए गहराई तक मार करने वाले हथियारों का प्रयोग हुआ।

अन्य ठिकानों पर भी स्ट्राइक

इसी अभियान के तहत ईरान के अन्य ठिकानों पर भी हमले हुए, जिनमें राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान का कार्यालय भी शामिल था। हालांकि उन्होंने बाद में खुद को सुरक्षित बताया। इसराइल ने दावा किया कि हमले में ईरान के सात वरिष्ठ रक्षा अधिकारी मारे गए, जिनमें अली शमखानी, रक्षा मंत्री अज़ीज़ नसिरज़ादेह और इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर के कमांडर मोहम्मद पाकपोर शामिल बताए गए।

अमेरिका में निगरानी, उत्तराधिकार की तैयारी

हमले के वक्त अमेरिका में मार-ए-लागो में आधी रात थी, जहां राष्ट्रपति ट्रंप अपने शीर्ष अधिकारियों के साथ घटनाक्रम पर नज़र बनाए हुए थे। ख़ामेनेई की मौत की पुष्टि में कई घंटे लगे, लेकिन खबर है कि ईरान पहले से उत्तराधिकार की योजना तैयार कर चुका था।

आगे क्या असर पड़ेगा?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस हाई-प्रोफाइल हत्या का पूरे क्षेत्रीय संघर्ष और वैश्विक राजनीति पर क्या असर होगा। फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है।

 

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