खरमास 2026: कब से शुरू होगा और जानिए शुभ-अशुभ कार्य और महत्व

हिंदू धर्म में खरमास को एक विशेष धार्मिक अवधि माना जाता है। इस समय को आध्यात्मिक साधना, पूजा-पाठ और दान-पुण्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान कुछ मांगलिक कार्यों से बचना चाहिए और भगवान की भक्ति पर अधिक ध्यान देना चाहिए। हर साल यह अवधि लगभग एक महीने तक रहती है और सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश के साथ शुरू होती है।

2026 में खरमास कब से कब तक रहेगा

पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में खरमास 15 मार्च से शुरू होकर 14 अप्रैल तक रहेगा। जब सूर्य देव मीन राशि में प्रवेश करते हैं तब खरमास की शुरुआत मानी जाती है। इसके समाप्त होने के बाद जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं, तब फिर से मांगलिक कार्य शुरू किए जाते हैं।

खरमास का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खरमास को आत्मचिंतन और आध्यात्मिक उन्नति का समय माना जाता है। इस अवधि में भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस समय किए गए दान, जप और तप का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए लोग इस दौरान धार्मिक गतिविधियों में अधिक समय लगाते हैं।

खरमास में क्या करना चाहिए

खरमास के दौरान व्यक्ति को अपने जीवन में सकारात्मकता और आध्यात्मिकता बढ़ाने के लिए कुछ शुभ कार्य करने चाहिए।

  • भगवान विष्णु और सूर्य देव की नियमित पूजा करें।
  • जरूरतमंद लोगों को दान दें, जैसे अन्न, वस्त्र या धन।
  • धार्मिक ग्रंथों जैसे गीता या रामायण का पाठ करें।
  • सुबह जल्दी उठकर ध्यान और जप करें।
  • गरीब और जरूरतमंद लोगों की सेवा करें।
  • तीर्थ यात्रा या मंदिर दर्शन करना भी शुभ माना जाता है।

इन कार्यों को करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।

खरमास में क्या नहीं करना चाहिए

खरमास के दौरान कुछ कार्यों को करना शुभ नहीं माना जाता। इसलिए इस अवधि में निम्न कामों से बचने की सलाह दी जाती है।

  • विवाह, सगाई या अन्य मांगलिक समारोह नहीं करने चाहिए।
  • गृह प्रवेश, भूमि पूजन या नए घर का निर्माण शुरू नहीं करना चाहिए।
  • मुंडन, नामकरण या जनेऊ जैसे संस्कारों को टालना चाहिए।
  • नया व्यापार या बड़ा निवेश शुरू करने से बचना चाहिए।
  • नया वाहन, घर या महंगे आभूषण खरीदना भी टालना चाहिए।
  • मांसाहार और नशे जैसी चीजों से दूर रहना चाहिए।

 

खरमास को केवल अशुभ समय मानना सही नहीं है। वास्तव में यह समय आध्यात्मिक विकास और आत्मशुद्धि के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान यदि व्यक्ति पूजा-पाठ, दान-पुण्य और अच्छे कर्म करता है तो उसे विशेष पुण्य प्राप्त होता है।

इसलिए वर्ष 2026 में 15 मार्च से 14 अप्रैल तक रहने वाले खरमास के दौरान मांगलिक कार्यों को टालकर धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों पर ध्यान देना अधिक लाभकारी माना जाता है।

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.