एक नेता, दो पार्टियां और दोनों बार धमाकेदार जीत! जानिए खेरागढ़ विधानसभा सीट का पूरा चुनावी इतिहास

उत्तर प्रदेश की सियासत में आज बात आगरा जिले की खेरागढ़ विधानसभा सीट की, जहां पिछले तीन चुनावों में पार्टी बदली, उम्मीदवारों की किस्मत बदली और जीत का अंतर भी लगातार बढ़ता नजर आया। साल 2012 में यहां बहुजन समाज पार्टी ने जीत दर्ज की, 2017 में भारतीय जनता पार्टी ने बाजी पलट दी और 2022 में भाजपा ने एक बार फिर इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। लेकिन खेरागढ़ की कहानी में सबसे दिलचस्प नाम है भगवान सिंह कुशवाहा का। जी हां, वही भगवान सिंह कुशवाहा, जिन्होंने साल 2012 में बसपा के टिकट पर जीत हासिल की और फिर साल 2022 में भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बने। यानी एक ही नेता, दो अलग-अलग पार्टियां और दो अलग-अलग चुनावों में जीत! साल 2012 में भगवान सिंह कुशवाहा ने समाजवादी पार्टी की रानी पक्षालिका सिंह को 7 हजार 106 वोटों से हराया था। लेकिन 2017 में भाजपा के महेश कुमार गोयल ने चुनावी समीकरण बदल दिया और बसपा के भगवान सिंह कुशवाहा को 31 हजार 999 वोटों से शिकस्त दी। आइए, पिछले तीन विधानसभा चुनावों के आंकड़ों के जरिए समझते हैं खेरागढ़ सीट का पूरा चुनावी इतिहास और सियासी सफर।

सबसे पहले बात करते हैं साल 2012 के विधानसभा चुनाव की। उस समय खेरागढ़ सीट पर बहुजन समाज पार्टी के भगवान सिंह कुशवाहा ने जीत दर्ज की थी। उनके सामने समाजवादी पार्टी की रानी पक्षालिका सिंह थीं और मुकाबला काफी करीबी रहा। चुनाव में भगवान सिंह कुशवाहा को कुल 69 हजार 533 वोट मिले, जबकि सपा की रानी पक्षालिका सिंह को 62 हजार 427 वोट प्राप्त हुए। दोनों के बीच जीत का अंतर सिर्फ 7 हजार 106 वोट रहा। यानी भगवान सिंह कुशवाहा ने सपा उम्मीदवार को हराकर विधानसभा में अपनी जगह बनाई, लेकिन यह जीत बहुत बड़े अंतर से नहीं मिली थी। इस चुनाव में मतदान प्रतिशत 64.67 रहा। नतीजों से साफ था कि खेरागढ़ में बसपा और समाजवादी पार्टी के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला। 2012 में भगवान सिंह कुशवाहा बसपा के उम्मीदवार के रूप में जीते और उन्होंने अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत की। लेकिन अगले विधानसभा चुनाव में उनके सामने एक नई चुनौती आने वाली थी।

अब बात साल 2017 के विधानसभा चुनाव की। इस बार खेरागढ़ में राजनीतिक तस्वीर बदल गई और भाजपा के महेश कुमार गोयल ने जीत हासिल की। महेश कुमार गोयल को 93 हजार 510 वोट मिले, जबकि पिछले चुनाव के विजेता भगवान सिंह कुशवाहा को बसपा के टिकट पर 61 हजार 511 वोट प्राप्त हुए। इस तरह भाजपा के महेश कुमार गोयल ने 31 हजार 999 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। जरा 2012 और 2017 के नतीजों को देखिए। साल 2012 में भगवान सिंह कुशवाहा ने बसपा के टिकट पर जीत हासिल की थी, लेकिन 2017 में वही उम्मीदवार दूसरे स्थान पर पहुंच गए। भाजपा के महेश कुमार गोयल ने पहला स्थान हासिल करके खेरागढ़ में पार्टी को जीत दिलाई। यहां जीत का अंतर भी काफी महत्वपूर्ण रहा। 2012 में जहां भगवान सिंह कुशवाहा की जीत का अंतर 7 हजार 106 वोट था, वहीं 2017 में भाजपा की जीत का अंतर बढ़कर 31 हजार 999 वोट हो गया। मतदान प्रतिशत की बात करें तो 2012 में यह 64.67 प्रतिशत था, जबकि 2017 में लगभग 64.17 प्रतिशत रहा। इन नतीजों के साथ खेरागढ़ में भाजपा ने अपनी मौजूदगी को जीत में बदला और बसपा को पीछे छोड़ दिया। लेकिन 2022 के चुनाव में एक बार फिर भगवान सिंह कुशवाहा की वापसी होने वाली थी इस बार पार्टी का टिकट बदल चुका था।

अब आते हैं साल 2022 के विधानसभा चुनाव पर। इस बार भाजपा ने खेरागढ़ सीट से भगवान सिंह कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया। ध्यान दीजिए, 2012 में भगवान सिंह कुशवाहा बसपा के टिकट पर जीते थे। 2017 में बसपा के उम्मीदवार के रूप में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। लेकिन 2022 में भाजपा ने उन्हें टिकट दिया और उन्होंने जीत दर्ज कर ली। इस चुनाव में भगवान सिंह कुशवाहा को 96 हजार 574 वोट मिले। वहीं कांग्रेस के रामनाथ सिंह सिकरवार को 60 हजार 77 वोट प्राप्त हुए। इस तरह भाजपा के उम्मीदवार ने कांग्रेस को 36 हजार 497 वोटों से हराया। बसपा के गंगाधर कुशवाह 28 हजार 988 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे, जबकि राष्ट्रीय लोक दल के रोहतन को 14 हजार 133 वोट मिले। 2022 का नतीजा इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि भगवान सिंह कुशवाहा ने 2012 में बसपा के उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी और दस साल बाद 2022 में भाजपा के उम्मीदवार के तौर पर फिर जीत दर्ज की। भाजपा ने इस तरह खेरागढ़ सीट पर लगातार दूसरी बार जीत हासिल की। साल 2017 में महेश कुमार गोयल और 2022 में भगवान सिंह कुशवाहा भाजपा के टिकट पर विजयी रहे। अब जीत के अंतर पर भी गौर कीजिए। 2017 में भाजपा के महेश कुमार गोयल ने 31 हजार 999 वोटों से जीत दर्ज की थी। 2022 में भगवान सिंह कुशवाहा की जीत का अंतर बढ़कर 36 हजार 497 वोट हो गया। यानी जीत के अंतर में 4 हजार 498 वोटों की वृद्धि हुई। मतदान प्रतिशत लगभग 62.5 रहा। इस प्रकार 2022 में भाजपा ने अपनी सीट बरकरार रखी और भगवान सिंह कुशवाहा ने एक बार फिर विधायक बनने में सफलता हासिल की।

अब सबसे बड़ा सवाल 2027 के विधानसभा चुनाव में खेरागढ़ की तस्वीर कैसी होगी? क्या भाजपा लगातार तीसरी बार जीत दर्ज कर पाएगी? क्या बसपा अपनी पुरानी जीत को दोहराने की कोशिश करेगी? क्या कांग्रेस अपने 2022 के प्रदर्शन को आगे बढ़ा पाएगी? और क्या समाजवादी पार्टी भी मुकाबले में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश करेगी? इन सवालों का जवाब अभी तय नहीं है। 2027 के चुनाव में उम्मीदवारों का चयन, राजनीतिक दलों की रणनीति, स्थानीय मुद्दे और मतदाताओं की प्राथमिकताएं अहम भूमिका निभा सकती हैं। पिछले तीन चुनावों का इतिहास जरूर बताता है कि खेरागढ़ में जीतने वाली पार्टी बदल चुकी है और भगवान सिंह कुशवाहा ने दो अलग-अलग दलों से जीत दर्ज की है। मगर 2027 का फैसला मतदाता ही करेंगे।

तो यह थी आगरा जिले की खेरागढ़ विधानसभा सीट की पूरी चुनावी कहानी। साल 2012 में बसपा के भगवान सिंह कुशवाहा ने जीत हासिल की। साल 2017 में भाजपा के महेश कुमार गोयल ने सीट पर कब्जा किया। फिर 2022 में भाजपा ने भगवान सिंह कुशवाहा को टिकट दिया और उन्होंने कांग्रेस के रामनाथ सिंह सिकरवार को 36 हजार 497 वोटों से हराकर जीत दर्ज की। तीन चुनावों में दो पार्टियों की जीत देखने को मिली और एक ही नेता ने दो अलग-अलग दलों के टिकट पर विधानसभा पहुंचने में सफलता हासिल की। अब 2027 में खेरागढ़ का चुनावी मुकाबला किस दिशा में जाएगा? क्या भाजपा जीत का सिलसिला जारी रखेगी, क्या बसपा वापसी करेगी या फिर कोई नया राजनीतिक समीकरण सामने आएगा?

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.