सरकारी सहायता नहीं मिली, फिर भी नहीं मानी हार; पोल्ट्री फार्म से बदली रामसिंह महतो की जिंदगी

खूंटी : मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के बल पर इंसान किसी भी मुश्किल को अवसर में बदल सकता है। इसका जीता-जागता उदाहरण खूंटी जिले के एरेंडा गांव निवासी रामसिंह महतो हैं, जिन्होंने बिना किसी सरकारी सहायता के पोल्ट्री फार्म की शुरुआत कर आज अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाकर अन्य किसानों के लिए प्रेरक बन गए हैं। उनके इस प्रयास से न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है, बल्कि वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा भी दिला रहे हैं ताकि उन्हें भविष्य में उन संघर्षों का सामना न करना पड़े, जिनसे उनके माता-पिता गुजरे हैं।

रामसिंह महतो वर्तमान में लगभग 5,300 मुर्गियों का पालन कर रहे हैं। पोल्ट्री व्यवसाय को आधुनिक तरीके से संचालित करने के लिए उन्होंने कई आवश्यक सुविधाएं बहाल की हैं। गर्मी के मौसम में मुर्गियों को राहत पहुंचाने के लिए पोल्ट्री शेड की छत पर पानी के फुहारे की व्यवस्था की गई है, जिससे तापमान नियंत्रित रहता है। वहीं मुर्गियों के लिए ऑटोमेटिक पाइपलाइन आधारित पेयजल की भी व्यवस्था की गई है, ताकि उन्हें हर समय स्वच्छ पानी उपलब्ध हो सके।
C न्यूज़ भारत के संवादाता से बातचीत करते हुए रामसिंह महतो ने बताया कि पोल्ट्री फार्म शुरू करने के दौरान उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने सरकारी सहायता प्राप्त करने के लिए कई बार प्रखंड कार्यालय के चक्कर लगाए, लेकिन कोई लाभ नहीं मिल सका। इसके बाद उन्होंने बैंक से लोन लेने का प्रयास किया, मगर वहां से भी निराशा हाथ लगी।
रामसिंह ने बताया कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। पति-पत्नी ने मिलकर विचार-विमर्श किया और अंत मे महिला स्वयं सहायता समूह से लोन लेकर पोल्ट्री फार्म की नींव रखी। धीरे-धीरे मेहनत रंग लाई और आज उनका व्यवसाय सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को सही मार्गदर्शन और समय पर आर्थिक सहायता मिले तो वे स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बन सकते हैं। आज उनका पोल्ट्री फार्म न केवल उनके परिवार के लिए आय का साधन बना है, बल्कि आसपास के लोगों के लिए भी प्रेरणा का सबक बन गया है।
ग्रामीण क्षेत्र में सीमित संसाधनों के बावजूद रामसिंह महतो ने यह साबित कर दिया हौसला बुलंद और मेहनत के दम पर सफलता हासिल की जा सकती है। उनकी सफलता की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो स्वरोजगार नहीं करने के बहाने पलायन का शिकार होते हैं।
 

रिपोर्टर : शहीद अंसारी

 

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