किसानों के चेहरे पर आम बागवानी से लौटी मुस्कान
खूंटी - जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में आम बागवानी किसानों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत बनती जा रही है। मनरेगा योजना के तहत लगाए गए आम के बाग आज कई किसानों के परिवार के भरण-पोषण के साथ-साथ उनके बच्चों की शिक्षा और बेहतर भविष्य का आधार बन रहे हैं। जिले के एरेण्डा क्षेत्र सहित विभिन्न गांवों के किसान आम की खेती कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इन्हीं किसानों में से एक रामसिंह महतो ने बताया कि उन्होंने लगभग ढाई एकड़ भूमि में आम का बागीचा लगाया है। इस बागवानी को तैयार करने में उन्होंने और उनकी पत्नी ने दिन-रात कड़ी मेहनत की। पौधों की देखभाल, सिंचाई, सुरक्षा और रखरखाव में दोनों ने पूरी लगन और मेहनत के साथ काम किया, जिससे अच्छी पैदावार की उम्मीद हैं. हालांकि इस वर्ष मौसम की मार ने किसानों की उम्मीदों को झटका दिया है। रामसिंह महतो ने बताया कि ओलावृष्टि के कारण उनके बाग में लगे आम की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। ढाई एकड़ में लगी फसल लगभग बर्बाद हो गई, जिससे उन्हें आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि लंबे समय की मेहनत और उम्मीदों के बावजूद हवा पानी के कारण लाभ नहीं मिल सका। इसके बावजूद किसानों का कहना है कि आम बागवानी उनके लिए रोजगार और आय का एक स्थायी माध्यम बन रही है। आम के बाग से प्राप्त आय से वे अपने परिवार का खर्च चलाने के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और अन्य आवश्यक जरूरतों को भी पूरा कर पा रहे हैं।
ग्रामीण किसानों का मानना है कि यदि सरकार की ओर से समय-समय पर तकनीकी सहायता,सिंचाई की बेहतर व्यवस्था तथा प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान की भरपाई के लिए उचित मुआवजा मिले,तो आम बागवानी क्षेत्र में और अधिक किसान जुड़ सकते हैं। आम बागवानी किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बन रहा है।
रिपोर्टर - शहीद अंसारी
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