अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर खूंटी में दो जागरूकता शिविर आयोजित

खूंटी : अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर नालसा (जागृति) योजना, 2025 के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकार, खूंटी द्वारा बुधवार को जिले में दो विधिक जागरूकता शिविरों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष रासिकेश कुमार के मार्गदर्शन में किया गया। इस वर्ष जागरूकता कार्यक्रम की थीम ‘सशक्त युवा, सशक्त भारत’ (Empowered Youth, Stronger India) रखी गई। सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में युवाओं को किया जागरूक पहला जागरूकता शिविर सी.एम. स्कूल ऑफ एक्सीलेंस, खूंटी में सहपाठी-से-सहपाठी विधिक साक्षरता सत्र के रूप में आयोजित हुआ। विधिक साक्षरता क्लब के सदस्यों प्रवेश टोप्पो, कनक कुमारी एवं अन्वेषा भगत ने डायन प्रथा, सामाजिक कुरीतियों, नशा सेवन एवं बाल विवाह जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर छात्र-छात्राओं को जागरूक किया।

कार्यक्रम में मुख्य विधिक सहायता प्रतिरक्षा पैनल अधिवक्ता (Chief LADC) राजीव कमल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने युवाओं को सशक्त बनने के लिए कार्य एवं लक्ष्य के प्रति ‘3-डी मॉडल’—दृढ़ संकल्प (Determination), समर्पण (Devotion) एवं निष्ठा (Dedication) अपनाने के लिए प्रेरित किया।
विद्यालय के प्राचार्य एवं शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने तथा सामाजिक परिवर्तन में सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
उप-कारा में बंदियों को दी गई कानूनी जानकारी
दूसरा शिविर उप-कारा, खूंटी में आयोजित किया गया, जिसे सिविल जज (वरिष्ठ प्रभाग)-सह-सचिव, डीएलएसए, खूंटी कमलेश बेहरा द्वारा संबोधित किया गया। उन्होंने बंदियों को विधिक प्रतिनिधित्व के उनके मौलिक अधिकार की जानकारी दी। साथ ही बताया कि जरूरत पड़ने पर डीएलएसए, खूंटी के माध्यम से निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
बंदियों को कारा विधिक सहायता क्लिनिक (Prison Legal Aid Clinic), विधिक सहायता प्रतिरक्षा पैनल (LADC), जेल पी.एल.वी. एवं सामुदायिक पी.एल.वी. की भूमिका के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। बताया गया कि ये व्यवस्थाएं विभिन्न कानूनी राहत के लिए आवेदन तैयार करने में बंदियों की सहायता करती हैं।
कार्यक्रम में अल्प-विचाराधीन बंदी समीक्षा समिति (UTRC) की भूमिका के संबंध में भी जानकारी दी गई। बंदियों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 479 के प्रावधानों के बारे में बताया गया, जिसमें पात्र मामलों में सजा की निर्धारित अवधि पूरी होने अथवा प्रथम-अपराधी बंदियों के लिए निर्धारित अवधि पूरी होने पर जमानत/रिहाई से संबंधित प्रावधानों की जानकारी दी गई।
इसके अलावा बंदियों को लोक अदालत हेल्प डेस्क की गतिविधियों से अवगत कराया गया। बंदियों के परिजनों से संपर्क कर उन्हें सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए आवश्यक आवेदन-पत्र तैयार किए जाने की जानकारी भी दी गई।
सचिव ने ऐसे दोषसिद्ध बंदियों को समयपूर्व रिहाई से संबंधित नियमों की जानकारी दी, जिन्होंने अपनी सजा की निर्धारित अवधि पूरी कर ली है। साथ ही पारिवारिक परामर्श एवं पुनर्वास संबंधी विधिक सहायता और विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के बारे में भी जानकारी साझा की गई।

रिपोर्टर : शहीद अंसारी 

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