गुरु के मार्गदर्शन में बदल रही कठिन परिस्थितियों से आए बच्चों की जिंदगी
खूंटी - कठिन पारिवारिक परिस्थितियों से गुजर रहे बच्चों के लिए नेताजी सुभाषचंद्र बोस आवासीय विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि उनके भविष्य को नई दिशा देने का माध्यम भी है। अनाथ,एकल अभिभावक परिवार तथा अन्य कठिन परिस्थितियों से आने वाले बच्चे यहां शिक्षा के साथ अनुशासन, संस्कार और आत्मविश्वास की सीख लेकर अपने सपनों को आकार दे रहे हैं। शनिवार को विद्यालय में इन्हीं बच्चों ने उत्साह और उमंग के साथ शिक्षक दिवस मनाया।
कार्यक्रम का उद्घाटन विद्यालय की प्राचार्या ने दीप प्रज्वलित कर तथा डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की तस्वीर पर माल्यार्पण कर किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने गीत, नृत्य सहित रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर शिक्षकों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त किया। बच्चों की प्रस्तुतियों ने समारोह में मौजूद लोगों का मन मोह लिया। समारोह में शिक्षकों ने गुरु-शिष्य संबंध के महत्व तथा जीवन में अनुशासन की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं,बल्कि परिस्थितियों से जूझ रहे बच्चों में आत्मविश्वास जगाकर उन्हें बेहतर भविष्य के लिए तैयार करना भी है। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन एवं शिक्षा के प्रति उनके योगदान पर भी प्रकाश डाला गया।
विद्यालय की वार्डन प्रतिमा देवी ने कहा, “इन बच्चों के जीवन में कई चुनौतियां रही हैं, लेकिन शिक्षा और सही मार्गदर्शन के माध्यम से वे अपने भविष्य को बदल सकते हैं। हमारा प्रयास है कि हर बच्चा खुद पर विश्वास करे, अनुशासन और संस्कार के साथ आगे बढ़े तथा अपने सपनों को साकार करे।”
मौके पर वरिष्ठ शिक्षक अब्राहम टूटी, सहायक शिक्षक अर्चना कुमारी, नेहा कुमारी, श्वेता कुमारी, रवि राम, मुस्कान कुमारी, एसएमसी सदस्य नमिता देवी, संध्या देवी, पिंकी देवी तथा हँस फाउंडेशन के जितेन्दर कुमार, इरशाद, नीतू कुमारी, सोनम कुमारी, प्रीति कुमारी सहित अन्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यार्थियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
रिपोर्टर - शहीद अंसारी
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