DLSA खूंटी में ‘निर्णय और लैंगिकता’ विषय पर संगोष्ठी, महिलाओं और बच्चों के अधिकारों पर दिया गया जोर

खूंटी : में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) की ओर से पुलिस अधिकारियों और अन्य हितधारकों के लिए ‘निर्णय और लैंगिकता’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (JHALSA), रांची के निर्देशानुसार आयोजित इस कार्यक्रम में महिलाओं और बच्चों के अधिकारों, लैंगिक संवेदनशीलता तथा यौन अपराधों के पीड़ितों की गरिमा और निजता की रक्षा पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम में न्यायिक पदाधिकारियों, पुलिस अधिकारियों, किशोर न्याय बोर्ड, बाल कल्याण समिति, चिकित्सा विभाग के प्रतिनिधियों और पैरा लीगल वॉलंटियर्स ने भाग लिया।

वीओ : संगोष्ठी में न्यायिक पदाधिकारियों ने महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता, निष्पक्षता और जवाबदेही के साथ काम करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। अनुमंडलीय न्यायिक दंडाधिकारी सुश्री विद्यावती ने महिलाओं के सम्मान, समान कानूनी संरक्षण और सशक्तीकरण पर जोर देते हुए अपमानजनक एवं लैंगिक रूप से असंवेदनशील भाषा के प्रयोग से बचने की बात कही।
सहायक लोक अभियोजक श्री वरुणाई ने बंद कमरे में सुनवाई, पीड़ितों की निजता की रक्षा और द्वितीयक उत्पीड़न को रोकने के उपायों पर चर्चा की। वहीं, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों में न्यायिक संस्थाओं तथा पुलिस की भूमिका और जिम्मेदारियों को रेखांकित किया।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-III सुश्री प्राची मिश्रा ने विभिन्न न्यायिक निर्णयों के माध्यम से लैंगिक संवेदनशीलता और पीड़ितों के कानूनी अधिकारों की रक्षा के महत्व को समझाया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित विशेष न्यायाधीश, पॉक्सो, श्री राकेश कुमार मिश्रा ने कहा कि पीड़ितों की गरिमा और अधिकारों की रक्षा के लिए सभी संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय आवश्यक है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों और अन्य हितधारकों से यौन अपराधों के पीड़ितों के साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार करने तथा उनकी पहचान की गोपनीयता बनाए रखने की अपील की।
संगोष्ठी के दौरान ‘निर्णय और लैंगिकता’ विषय से संबंधित अध्ययन सामग्री भी वितरित की गई, ताकि पुलिस अधिकारी और अन्य हितधारक अपने कार्यों में न्यायिक दिशा-निर्देशों का व्यावहारिक उपयोग कर सकें।
बाइट के लिए मुख्य बिंदु : महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा, पीड़ितों की गरिमा एवं निजता बनाए रखना, लैंगिक रूढ़ियों से बचना और न्याय प्रक्रिया में सभी संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना।


रिपोर्टर : शहीद अंसारी

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