गमले में ऐसे उगाएं करेला, 55 से 70 दिन में मिलने लग सकते हैं फल

घर की छत या बालकनी में सब्जियां उगाने का चलन बढ़ रहा है। कम जगह में भी करेला आसानी से उगाया जा सकता है, क्योंकि इसकी बेल ऊपर की ओर फैलती है। गर्म मौसम, पर्याप्त धूप और हल्की नमी मिलने पर बीज लगाने के करीब 55 से 70 दिन बाद फल आना शुरू हो सकते हैं।

गमला और मिट्टी ऐसे करें तैयार

करेले के लिए 15 से 18 इंच गहरा और चौड़ा गमला चुनें, जिसमें पानी निकासी के लिए पर्याप्त छेद हों। गमले को ऐसी जगह रखें, जहां रोज करीब 6 से 8 घंटे सीधी धूप मिले। मिट्टी तैयार करने के लिए गार्डन सॉइल, कम्पोस्ट और कोकोपीट को बराबर मात्रा में मिला सकते हैं। मिट्टी ज्यादा चिकनी हो तो थोड़ी रेत भी मिलाई जा सकती है।

बीज लगाने का सही तरीका

अच्छी गुणवत्ता वाले बीज लें और उन्हें लगाने से पहले कुछ घंटे पानी में भिगो सकते हैं। तैयार मिट्टी में करीब एक इंच गहराई पर दो से तीन बीज लगाएं और ऊपर से हल्की मिट्टी डालकर पानी दें। तेज धार से पानी डालने से बचें, ताकि बीज अपनी जगह से न हटें। सामान्य तौर पर 7 से 10 दिन में अंकुर निकल सकते हैं।

कमजोर पौधों को हटा दें

जब पौधे पर कुछ पत्तियां आ जाएं तो सबसे मजबूत पौधे को रखें और बाकी कमजोर पौधों को हटा दें। एक ही गमले में ज्यादा पौधे होने से जड़ों के बीच पानी, खाद और जगह को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। मिट्टी को हल्का नम रखें और ऊपर की परत सूखने पर ही जरूरत के अनुसार पानी दें।

बेल को जाली का सहारा दें

करेला बेल वाली सब्जी है, इसलिए शुरुआत से ही मजबूत जाली या अन्य सपोर्ट की व्यवस्था करें। नई शाखाओं को हल्के हाथ से जाली की ओर मोड़ें। बेल को जमीन पर फैलने देने के बजाय ऊपर चढ़ाने से हवा और धूप का बेहतर संचार हो सकता है। बेल को कसकर बांधने से बचें। पौधे को पोषण देने के लिए हर 15 से 20 दिन में अच्छी तरह तैयार जैविक खाद दी जा सकती है। पत्तियों के नीचे कीड़े, सफेद धब्बे या चिपचिपापन दिखाई दे तो पौधे की जांच करें और जरूरत के अनुसार उपचार करें।

फूल आने पर रखें इन बातों का ध्यान

करेले में नर और मादा फूल अलग-अलग आते हैं। यदि मधुमक्खियों या अन्य परागण करने वाले कीड़ों की गतिविधि कम हो तो सुबह हाथ से परागण करने से फल बनने में मदद मिल सकती है।

समय पर करें करेले की तुड़ाई

जब करेला हरा, मजबूत और मुलायम दिखाई दे तो उसकी कटाई कर लें। समय पर फल तोड़ने से बेल पर नए फल आने में मदद मिलती रहती है। पानी जमा होने, कम धूप और कमजोर सपोर्ट जैसी स्थितियों से पौधे की बढ़त प्रभावित हो सकती है।

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