मंत्रालय के दरवाजे पत्रकारों के लिए बंद तो सवाल भी उठेंगे
रांची : कोडरमा। झारखंड मंत्रालय (प्रोजेक्ट भवन) में मीडियाकर्मियों के प्रवेश पर रोक को लेकर पत्रकारों के बीच आक्रोश बढ़ता जा रहा है। झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन (JJA) ने इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए इसे पत्रकारिता की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक बताया है। पत्रकारों ने विरोध स्वरूप कैबिनेट बैठक की कवरेज का बहिष्कार कर अपनी नाराजगी भी दर्ज कराई। इस मुद्दे पर सी न्यूज़ भारत ने भी JJA के लोकतांत्रिक विरोध का समर्थन किया है। सी न्यूज़ भारत से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार अमित सिंह एवं वरिष्ठ पत्रकार अनिल सिंह ने मंत्रालय में पत्रकारों की एंट्री पर रोक के खिलाफ खुलकर आवाज उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की स्वतंत्रता पर किसी भी प्रकार का अनावश्यक पहरा स्वीकार नहीं किया जा सकता।
‘पत्रकार सवाल पूछेंगे, यही लोकतंत्र की खूबसूरती है’ अमित सिंह और अनिल सिंह ने कहा कि पत्रकार किसी सरकार या राजनीतिक दल के दुश्मन नहीं होते। पत्रकारों की जिम्मेदारी जनता की आवाज को शासन तक पहुंचाना और शासन की गतिविधियों एवं निर्णयों की जानकारी जनता तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि यदि सुरक्षा या प्रशासनिक कारणों से मंत्रालय में प्रवेश व्यवस्था में बदलाव आवश्यक है, तो सरकार को पत्रकार संगठनों के साथ संवाद स्थापित कर एक व्यावहारिक और संतुलित व्यवस्था बनानी चाहिए। ऐसी कोई व्यवस्था नहीं होनी चाहिए जिससे पत्रकारों को समाचार संकलन और जनहित से जुड़े मुद्दों की कवरेज में अनावश्यक बाधा उत्पन्न हो। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूत रखने के लिए पत्रकारों को सवाल पूछने, जानकारी जुटाने और जनता तक समाचार पहुंचाने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। पत्रकारों के लिए मंत्रालय के दरवाजे बंद करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है।
JJA के साथ मजबूती से खड़ा है सी न्यूज़ भारत सी न्यूज़ भारत से जुड़े पत्रकारों ने कहा कि JJA ने पत्रकारों के अधिकार, सम्मान और स्वतंत्र पत्रकारिता से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाया है और इस लोकतांत्रिक आवाज के समर्थन में वे मजबूती से खड़े हैं। वरिष्ठ पत्रकार अमित सिंह ने कहा कि पत्रकारिता किसी व्यक्ति विशेष या सत्ता के पक्ष अथवा विपक्ष की लड़ाई नहीं है। पत्रकारिता का मूल उद्देश्य सच, पारदर्शिता और जनता के अधिकारों को सामने लाना है। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी राजनीतिक दल की हो, मीडिया को निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से अपना दायित्व निभाने का अवसर मिलना चाहिए। वहीं वरिष्ठ पत्रकार अनिल सिंह ने कहा कि पत्रकारों को रोकने के बजाय सरकार को मीडिया और पत्रकार संगठनों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करना चाहिए।उन्होंने कहा, “सरकार और मीडिया के बीच संवाद जितना मजबूत होगा, लोकतंत्र उतना ही मजबूत होगा।”
कैबिनेट बैठक की कवरेज के बहिष्कार से सामने आया विरोध मंत्रालय में प्रवेश पर रोक के विरोध में पत्रकारों द्वारा कैबिनेट बैठक की कवरेज का बहिष्कार किए जाने से विरोध खुलकर सामने आया। पत्रकारों ने सांकेतिक रूप से कैमरे बंद रखकर तथा अपने माइक और पहचान-पत्र रखकर नाराजगी दर्ज कराई। JJA ने सरकार से टकराव का रास्ता छोड़कर पत्रकार संगठनों के साथ संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की मांग की है। संगठन का मानना है कि पत्रकार लोकतंत्र के प्रहरी हैं और समाचार संकलन में अनावश्यक बाधाएं लोकतांत्रिक भावना के अनुरूप नहीं हैं। अमित सिंह और अनिल सिंह बोले—‘पत्रकारिता की आवाज दबाई नहीं जा सकती’ सी न्यूज़ भारत से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार अमित सिंह एवं वरिष्ठ पत्रकार अनिल सिंह ने स्पष्ट कहा कि पत्रकारों के अधिकार और सम्मान से जुड़े इस मुद्दे पर वे JJA के साथ खड़े हैं।
उन्होंने कहा— “मंत्रालय के दरवाजे बंद किए जा सकते हैं, लेकिन पत्रकारों के सवालों को बंद नहीं किया जा सकता। लोकतंत्र में सत्ता से सवाल करना पत्रकारिता का अधिकार ही नहीं, बल्कि उसकी जिम्मेदारी भी है।” दोनों पत्रकारों ने झारखंड सरकार से आग्रह किया कि मीडिया की स्वतंत्रता और पत्रकारों की भूमिका को ध्यान में रखते हुए पत्रकार संगठनों के साथ तत्काल संवाद स्थापित किया जाए तथा ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिसमें सुरक्षा, प्रशासनिक अनुशासन और स्वतंत्र पत्रकारिता—तीनों के बीच संतुलन बना रहे।
रिपोर्ट: अमित सिंह
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