मनोरंजन के नाम पर ‘मीना बाजार’ में नियमों की अनदेखी के आरोप, प्रशासन की निगरानी पर उठे सवाल

चिरमिरी - एमसीबी जिले के चिरमिरी स्थित बड़ा बाजार के कुरासिया ग्राउंड में इन दिनों आयोजित ‘Fun & Fair मीना बाजार उत्सव मेला’ को लेकर स्थानीय स्तर पर कई सवाल उठ रहे हैं। मनोरंजन के लिए लगाए गए झूले, दुकानें और अन्य गतिविधियों के बीच मेले की व्यवस्थाओं, प्रचार सामग्री, सुरक्षा तथा अनुमति की शर्तों के पालन को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मेले के प्रचार के लिए लगाए गए कुछ पोस्टर और चित्र आपत्तिजनक प्रकृति के हैं। विशेष रूप से ‘जलपरी’ कार्यक्रम के प्रचार को लेकर अश्लीलता के आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप यह भी है कि इन पोस्टरों का प्रचार शहर में पिकअप वाहन के माध्यम से किया जा रहा है।

बच्चों और परिवारों के लिए उपयुक्तता पर सवाल

मेले के अंदर लगाए गए कुछ चित्रों को लेकर भी स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि सार्वजनिक स्थान पर इस तरह की प्रचार सामग्री और चित्रों का प्रदर्शन बच्चों एवं परिवारों के लिए उचित है या नहीं, इसकी प्रशासनिक स्तर पर जांच होनी चाहिए।

पुलिस सहायता केंद्र मौजूद, लेकिन पत्राचार को लेकर सवाल

मेले में पुलिस सहायता केंद्र बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि आयोजन को लेकर संबंधित थाना एवं अन्य विभागों के साथ आवश्यक पत्राचार और अनुमति की औपचारिकताएं पूरी की गई हैं या नहीं। इस संबंध में प्रशासन की ओर से स्पष्ट जानकारी सामने आना बाकी है।

कम उम्र के बच्चों से काम कराने का आरोप

मेले की कुछ दुकानों में कथित तौर पर कम उम्र के बच्चों से काम कराए जाने की बात भी सामने आई है। यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है, तो संबंधित बाल श्रम कानूनों के तहत कार्रवाई का विषय बन सकता है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

अनुमति की शर्तों के पालन पर सबसे बड़ा सवाल

मेले को लेकर सबसे महत्वपूर्ण सवाल नगर पालिक निगम चिरमिरी द्वारा जारी अनुमति की शर्तों को लेकर उठ रहा है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार अनुमति पत्र में पानी और बिजली से जुड़े कुछ करतबों पर प्रतिबंध का उल्लेख है। इसके बावजूद मेले में बिजली से संचालित झूलों तथा गंदे पानी में ‘जलपरी’ कार्यक्रम संचालित किए जाने का आरोप लगाया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि इन गतिविधियों पर अनुमति की शर्तों के तहत प्रतिबंध है, तो उनका संचालन किस आधार पर किया जा रहा है?

प्रवेश शुल्क के साथ सुविधाओं पर भी सवाल

मेले में प्रवेश के लिए शुल्क लिए जाने की बात सामने आई है। वहीं, स्थानीय लोगों का आरोप है कि महिलाओं के लिए पर्याप्त शौचालय सुविधा तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं। मेले में भीड़ को देखते हुए सुरक्षा, स्वच्छता और आपातकालीन व्यवस्थाओं को लेकर भी निगरानी की आवश्यकता बताई जा रही है।

15 सितंबर तक मिली है अनुमति

जानकारी के अनुसार स्थानीय प्रशासन द्वारा मेले के आयोजन की अनुमति 15 सितंबर 2026 तक दी गई है। ऐसे में अब प्रशासन के सामने यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है कि मेले में संचालित गतिविधियों की जांच कराई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि अनुमति में निर्धारित सभी शर्तों का पालन हो रहा है। यदि जांच के दौरान नियमों अथवा अनुमति की शर्तों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

उठते सवाल

क्या मनोरंजन के नाम पर अनुमति की शर्तों की अनदेखी की जा रही है?
क्या मेले की प्रचार सामग्री बच्चों और परिवारों के लिए उपयुक्त है?
क्या सुरक्षा, स्वच्छता और महिलाओं के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं?
क्या कम उम्र के बच्चों से काम कराने के आरोपों की जांच होगी?

यदि अनुमति की शर्तों का उल्लंघन पाया जाता है, तो जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी? अब निगाह प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर है।

रिपोर्टर - मुस्ताक कुरैशी

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