बेटियों के 'दोष' की बलि चढ़ी एक और मां: कोटा में 'वंश' के तानों ने तोड़ी टीना की सांसें

कोटा :  कोटा शिक्षा की नगरी कोटा से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने आधुनिक समाज के चेहरे पर कालिख पोत दी है। रानपुर थाना क्षेत्र में एक विवाहिता, टीना राठौर, ने ससुराल पक्ष की मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर फांसी के फंदे पर झूल अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। टीना का 'कसूर' सिर्फ इतना था कि उसने दो मासूम बेटियों को जन्म दिया था।

बेटियों की किलकारी बनी 'अपराध', तानों ने छीना जीने का हक परिजनों के अनुसार, टीना के घर जब दूसरी बार बेटी ने जन्म लिया, तभी से ससुराल वालों का व्यवहार बदल गया। उसे "वंश आगे न बढ़ाने" और "सिर्फ बेटियां जनने" के नाम पर हर दिन तिल-तिल मरने के लिए मजबूर किया गया। समाज के इन तानों और घर की प्रताड़ना ने टीना को गहरे अवसाद (डिप्रेशन) में धकेल दिया। अंततः, अपनी दो नन्हीं बच्चियों के भविष्य की चिंता और वर्तमान के दर्द के बीच हारकर उसने मौत का रास्ता चुन लिया।

पुलिस की कार्रवाई और सुसाइड नोट रानपुर थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और अस्पताल की मोर्चरी में शिफ्ट कराया। पुलिस को घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसमें मृतका ने अपनी मानसिक पीड़ा और ससुराल के दबाव का मार्मिक वर्णन किया है। पुलिस अब इस मामले में दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने जैसे पहलुओं पर जांच कर रही है।

कब बदलेगी यह सोच?
एक तरफ हम 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' का नारा देते हैं, वहीं दूसरी तरफ कोटा की यह घटना बताती है कि आज भी बेटियों का जन्म कई घरों में मातम या ताने का कारण बनता है। टीना की मौत महज एक आत्महत्या नहीं, बल्कि उस सामाजिक सोच की हत्या है जो बेटियों को बोझ समझती है।

रिपोर्टर : सुरेश कुमार पटेरिया

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