'सफाई के सिपाही': आबिद और नितिन की जोड़ी ने पेश की भाईचारे की मिसाल, मंदिर-दरगाहों में बहाया पसीना।

कोटा - जब आस्था और सेवा का मेल होता है, तो शहर की फिजा बदल जाती है। कोटा के दो बड़े चेहरों—वरिष्ठ समाजसेवी आबिद खान और नितिन गौतम ने अपनी टीम के साथ मिलकर राजस्थान को एक ऐसा संदेश दिया है, जिसकी गूंज दूर तक जाएगी। महाशिवरात्रि और माहे रमजान के संगम पर नेशनल कांग्रेस वर्कर्स कमेटी के कार्यकर्ताओं ने मजहबी दीवारों को गिराकर 'श्रमदान' का वो मंजर पेश किया, जिसे देखकर हर शहरवासी का सिर फख्र से ऊंचा हो गया।

शिवपुरी धाम से बाबा जंगली शाह तक... सेवा का सैलाब

कार्यकर्ताओं ने हाथों में झाड़ू और तसले थामकर शहर के सबसे प्रतिष्ठित देवस्थलों—शिवपुरी धाम, टेकरा धाम, अधरशिला और बाबा जंगली शाह दरगाह की सूरत बदल दी। आगामी त्योहारों को देखते हुए कार्यकर्ताओं ने सुबह से ही मोर्चा संभाल लिया। हैरानी की बात यह रही कि धार्मिक स्थलों के आसपास से भारी मात्रा में गुटखा, तंबाकू और सिगरेट के पैकेटों का ढेर मिला, जिसे कार्यकर्ताओं ने पूरी मुस्तैदी से साफ किया।

"मंदिर-मस्जिद हमारी शान, गंदगी से है इनका अपमान"

प्रदेश अध्यक्ष आबिद खान ने कड़े शब्दों में कहा, "सार्वजनिक स्थलों और इबादतगाहों को गंदा करना विनाशकारी सोच है। हम चाहते हैं कि जब श्रद्धालु माथा टेकने आएं या जियारी दुआ के लिए हाथ उठाएं, तो उन्हें स्वच्छता की खुशबू मिले।

शहर की खूबसूरती ही हमारी असल पहचान है।

सौंदर्यकरण पर 'चार चांद' लगाने की मुहिम जिला अध्यक्ष नितिन गौतम ने बताया कि त्योहारों पर उमड़ने वाली भीड़ के लिए यह श्रमदान एक छोटा सा तोहफा है। इस अभियान ने साबित कर दिया कि कोटा की "गंगा-जमुनी तहजीब" सिर्फ किताबों में नहीं, बल्कि यहाँ के समाजसेवियों के खून में है।

संवाददाता - सुरेश कुमार पटेरिया

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