19 लाख के बिजली बिल में उलझा SC, ST और OBC छात्रों का हक, विधानसभा में दहाड़े विधायक चेतन पटेल

कोटा : कोटा के राजकीय कला महाविद्यालय के छात्रावासों में ताला और छात्रों की आंखों में मायूसी—यह मंजर है उन गरीब मेधावी छात्रों का, जिनका भविष्य सरकारी फाइलों और बिजली कंपनी की हठधर्मिता के बीच पिस रहा है।

पीपल्दा विधायक चेतन पटेल ने राजस्थान विधानसभा में इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए तीखे प्रहार किए।
समझौते की 'बलि' चढ़ रही गरीब की पढ़ाई
विधायक पटेल ने सदन के पटल पर बताया कि जुबली और रघुनाथ छात्रावास पर नवंबर 2020 से ₹19 लाख का बिजली बिल बकाया है। एक पुराने समझौते के तहत कॉलेज और यूआईटी को 50% राशि देनी थी, जो दे दी गई, लेकिन निजी बिजली कंपनी केईडील (KEDL) ने वादे के मुताबिक अपनी 50% छूट की फाइल दबा दी। नतीजा यह है कि आज भी छात्रावास अंधेरे में हैं और छात्रों को प्रवेश नहीं मिल पा रहा।

सरकार पर सीधा हमला: "गरीबों के प्रति गंभीर नहीं भाजपा"


पटेल ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने सहानुभूति दिखाते हुए कदम उठाए थे, लेकिन वर्तमान भाजपा सरकार गरीबों के प्रति संवेदनहीन बनी हुई है। उन्होंने कहा, "क्या बिजली बिल की वसूली एक गरीब छात्र की शिक्षा से बड़ी है? सरकार केईडील को निर्देशित क्यों नहीं कर रही?"

छात्रों का सवाल- हमारा क्या कसूर?

एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के सैकड़ों छात्र कमरों की बाट जोह रहे हैं। बाहर किराए पर रहने की उनकी हैसियत नहीं है और छात्रावास के दरवाजे बकाया बिल के कारण बंद हैं। विधायक ने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही केईडील ने समझौते के अनुसार बिल माफ कर प्रवेश शुरू नहीं किए, तो यह चिंगारी एक बड़े आंदोलन का रूप लेगी।

संवाददाता : सुरेश कुमार पटेरिया

 

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