करवाड़ में विकास पर लगा 'ग्रहण'

कोटा : जर्जर सड़कें और अतिक्रमण बना मुसीबत, कागजों में सिमटा विकासअधिकारी और जनप्रतिनिधि बेपरवाह; 8 माह से अधर में लटका धर्मशाला का काम, ग्रामीणों में भारी आक्रोश।

करवाड़ डिजिटल इंडिया और आदर्श ग्राम के दावों के बीच ग्राम पंचायत करवाड़ की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। गाँव की सरकार की उदासीनता और अधिकारियों की अनदेखी के चलते करवाड़ विकास की दौड़ में पिछड़ता जा रहा है। गाँव के मुख्य मार्गों पर अतिक्रमण का जाल और टूटी सड़कें न केवल राहगीरों के लिए मुसीबत बन गई हैं, बल्कि पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।

जिम्मेदार मौन, जनता परेशान:- ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम विकास अधिकारी (VDO) सिर्फ कार्यालयी खानापूर्ति तक सीमित हैं। गाँव के मुख्य रास्तों पर हुए अस्थाई अतिक्रमण के कारण आवागमन बाधित है, लेकिन बार-बार शिकायत के बावजूद पंचायत प्रशासन ने इसे हटाने की जहमत नहीं उठाई। सबसे विडंबना वाली बात यह है कि इसी मार्ग से उपखंड अधिकारी और तहसीलदार जैसे जिम्मेदार अधिकारियों का नियमित आवागमन होता है, फिर भी व्यवस्था सुधारने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया।

भ्रष्टाचार या लापरवाही? धर्मशाला की हालत बदतर:- विकास कार्यों में सुस्ती का सबसे बड़ा उदाहरण गाँव स्थित धर्मशाला है। इसके प्लास्टर को तोड़े हुए करीब आठ महीने का समय बीत चुका है, लेकिन काम आज भी अधूरा है। ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों के पास विकास के लिए न तो विजन है और न ही इच्छाशक्ति। ग्रामीणों ने तीखे लहजे में कहा कि जब "नकारा और निकम्मे" प्रतिनिधि सत्ता की बागडोर संभालते हैं, तो गाँव का हाल ऐसा ही होता है।

नौकरी बचाने में जुटे अधिकारी:-आरोप है कि स्थानीय अधिकारी केवल अपना समय काट रहे हैं और उच्च स्तर पर अपनी छवि बचाने में लगे हैं, जबकि धरातल पर जनता धूल और परेशानियों के बीच जीने को मजबूर है। ग्राम पंचायत की ओर से नए विकास कार्यों की स्वीकृति तो दूर, पुराने कार्यों को भी पूरा नहीं किया जा रहा है।

ग्रामीणों की हुंकार: उच्च स्तरीय जांच की मांग:
करवाड़ के ग्रामीणों ने अब इस मामले में जिला प्रशासन और राज्य सरकार से दखल की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही अतिक्रमण नहीं हटाया गया और विकास कार्यों को गति नहीं दी गई, तो वे जिला कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करेंगे। ग्रामीणों की मांग है कि ग्राम विकास अधिकारी और संबंधित जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय की जाए।

संवाददाता : सुरेश कुमार पटेरिया 

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