शाहबाद के 'कुदरती खजाने' पर संकट: 2 लाख पेड़ों की बलि चढ़ाकर बनेगा बिजली प्लांट

कोटा : राजस्थान के बारां जिले में स्थित शाहबाद के घनघोर जंगलों के अस्तित्व पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। एक निजी सौर ऊर्जा कंपनी के 'बिजली स्टोरेज प्लांट' के लिए हजारों साल पुराने प्राकृतिक जंगल को काटने की तैयारी की जा रही है। इस मुद्दे को लेकर पीपल्दा विधायक चेतन पटेल कोलाना ने मोर्चा खोलते हुए देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।

सरकारी आंकड़ों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर विधायक चेतन पटेल कोलाना ने अपने पत्र में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारी रिकॉर्ड में केवल 1.19 लाख पेड़ों की गिनती दिखाई गई है, जबकि हकीकत में यहाँ 2 लाख से अधिक छोटे-बड़े पेड़ मौजूद हैं। उन्होंने चिंता जताई कि 'डबल इंजन' की सरकार ने महज 22 दिनों में ही इस बेशकीमती वन भूमि के डायवर्जन की प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी है।

कुनो के चीतों पर भी मंडराएगा खतरा
विधायक ने तर्क दिया कि यह जंगल कुनो नेशनल पार्क से मात्र 15 किलोमीटर की दूरी पर है। एक तरफ सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर विदेशों से चीते लाकर बसा रही है, वहीं दूसरी तरफ उनके प्राकृतिक आवास के पास स्थित जंगलों को उजाड़ने की अनुमति दे रही है। यह न केवल वन्यजीवों बल्कि हजारों दुर्लभ जड़ी-बूटियों के विनाश का कारण बनेगा।

'रेगिस्तान में जंगल' के तर्क पर उठाए सवाल
सरकार के उस तर्क पर भी सवाल उठाए गए हैं जिसमें शाहबाद के बदले जैसलमेर के रेगिस्तान में पेड़ लगाने की बात कही गई है। कोलाना का कहना है कि 1000 किलोमीटर दूर रेगिस्तान में लगाए गए मानव निर्मित पेड़ कभी भी हजारों साल पुराने प्राकृतिक जंगलों की जगह नहीं ले सकते।

आदिवासी समाज की चेतावनी: -'फिर होगा चिपको आंदोलन'
यह क्षेत्र आदिवासी बहुल है और स्थानीय समुदाय में इस फैसले को लेकर भारी आक्रोश है। विधायक ने पत्र में स्पष्ट किया है कि यदि पेड़ों की कटाई नहीं रोकी गई, तो आदिवासी समाज अपने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए अपने प्राणों की बाजी लगाकर 'चिपको आंदोलन' करने के लिए मजबूर होगा।

"आप स्वयं आदिवासी समुदाय से आती हैं, इसलिए हमें उम्मीद है कि आप आने वाली पीढ़ी के भविष्य और प्रकृति के संरक्षण के लिए इस विनाशकारी फैसले को रुकवाएंगी।"

रिपोर्टर : सुरेश कुमार पटेरिया

 

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