खाकी का मानवीय चेहरा: 9 दिन से बिछड़ी 14 वर्षीय मासूम की लौटी मुस्कान।

कोटा : पुलिस की 'एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट' का बड़ा एक्शन, जयपुर से टोंक तक बिछाया जाल; उनियारा से बालिका को किया सुरक्षित रेस्क्यू। कोटा शहर "बिटिया मिल गई!"... 18 मार्च से जिस घर के आंगन में सन्नाटा और मायूसी पसरी थी, वहां शुक्रवार को खुशियों की लहर दौड़ गई। कोटा शहर पुलिस की मानव तस्करी विरोधी यूनिट (AHTU) ने तत्परता और जांबाजी की मिसाल पेश करते हुए एक 14 वर्षीय नाबालिग बालिका को टोंक जिले के उनियारा से सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया है। साजिश या नादानी? जयपुर से मिला सुराग मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक (SP) तेजस्विनी गौतम ने तुरंत एक विशेष टीम का गठन किया था। थाना नान्ता में मामला दर्ज होने के बाद एएसपी नियति शर्मा और एएचटीयू प्रभारी मीनाक्षी की टीम ने 'तकनीकी पुलिसिंग' (साइबर सेल) का सहारा लिया। सुराग मिले कि बालिका जयपुर के प्रतापनगर में हो सकती है, लेकिन टीम जब वहां पहुंची तो बालिका वहां से निकल चुकी थी।


उनियारा में आधी रात का ऑपरेशन पुलिस ने हार नहीं मानी और मुखबिरों का जाल बिछाया। पुख्ता खबर मिली कि बालिका टोंक जिले के ग्राम पचारला (उनियारा) में है। टीम ने बिना वक्त गंवाए आधी रात को ही दबिश दी और बालिका को सकुशल बरामद कर लिया। बालिका के सुरक्षित मिलते ही पुलिस टीम ने उसे नान्ता पुलिस के सुपुर्द किया, जहाँ से उसे परिजनों के हवाले किया गया।


इन 'सुपरकॉप्स' ने निभाई अहम भूमिका इस सफल मिशन में एएसआई केशव सिंह, महिला कांस्टेबल आरती और कांस्टेबल सुनील की विशेष भूमिका रही। टीम की सूझबूझ और तकनीकी संसाधनों के सही उपयोग ने इस लापता मासूम को वापस उसके माता-पिता तक पहुँचाया।


"हमारा लक्ष्य केवल अपराध रोकना नहीं, बल्कि बिखरते परिवारों को जोड़ना भी है। टीम ने जिस पेशेवर तरीके से जयपुर से टोंक तक पीछा कर बालिका को बचाया, वह काबिले तारीफ है।"
— तेजस्विनी गौतम, पुलिस अधीक्षक, कोटा शहर

रिपोर्टर : सुरेश कुमार पटेरिया

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