तेज हवाओं और बूंदाबांदी से खेतों में बिछी गेहूं की फसल, किसानों की 6 महीने की मेहनत पर पानी
BY UJJWAL SINGH
बीती रात हुई बेमौसम हल्की बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है. कटाई के करीब पहुंच चुकी गेहूं की लहलहाती फसल कई जगहों पर पूरी तरह जमीन पर गिर गई है. खेतों में चादर की तरह बिछी फसल देखकर किसानों के चेहरे पर चिंता साफ झलक रही है. इस प्राकृतिक मार ने अन्नदाताओं को भारी आर्थिक नुकसान की चिंता में डाल दिया है.
तेज हवाओं ने फसलों को पहुंचाया भारी नुकसान
जनपद में बीती रात चली तेज हवाओं और हल्की बूंदाबांदी ने किसानों की उम्मीदों को गहरा झटका दिया है. जिन खेतों में कुछ ही दिनों बाद गेहूं की कटाई होनी थी, वहां अब फसल जमीन पर बिछी नजर आ रही है. कई स्थानों पर पूरी की पूरी फसल गिर गई है, जिससे उत्पादन पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति में गेहूं के दाने काले पड़ सकते हैं और उनका वजन भी कम हो जाता है। इससे किसानों को मंडियों में फसल का उचित मूल्य मिलने में भी मुश्किल हो सकती है.
किसानों ने बयां किया अपना दर्द
किसान रनजोद सिंह ने बताया कि इस बार उन्हें अच्छी फसल की उम्मीद थी. उन्होंने छह महीने तक मेहनत कर फसल तैयार की थी, लेकिन तेज हवाओं ने सब कुछ बर्बाद कर दिया. उनके अनुसार रात में चली तेज हवाओं के दौरान ऐसा लग रहा था जैसे खेत में कोई ट्रैक्टर चल रहा हो। सुबह जब खेत पहुंचे तो देखा कि पूरी फसल जमीन पर बिछ चुकी है.
उन्होंने बताया कि जब गेहूं गिर जाता है तो उसका दाना काला पड़ जाता है और वजन भी लगभग आधा रह जाता है. ऐसे में मंडी में सही कीमत मिलना भी मुश्किल हो जाता है. अब सबसे बड़ी चिंता अगली फसल के लिए बीज और खाद की व्यवस्था करने की है.
गिरी हुई फसल से बढ़ेगी कटाई की लागत
किसान मनदीप सिंह ने बताया कि फसल उनके लिए सिर्फ अनाज नहीं बल्कि खून-पसीने की कमाई है. दिन-रात मेहनत करके उन्होंने इस फसल को तैयार किया था, लेकिन हल्की बारिश और तेज हवा ने उनकी सारी मेहनत पर पानी फेर दिया. उन्होंने कहा कि फसल गिरने के बाद कटाई करना भी मुश्किल हो जाता है, क्योंकि कंबाइन मशीन इसे ठीक से नहीं उठा पाती। ऐसे में मजदूरों से कटाई करवानी पड़ सकती है, जिससे लागत और बढ़ जाएगी.
विशेषज्ञों ने दी यह जानकारी
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जिन बालियों में दाने पूरी तरह बन चुके थे, उनमें किसानों को कुछ हद तक उत्पादन मिल सकता है. लेकिन जो फसल अभी दूधिया अवस्था में थी, उसमें दाने हल्के आने या बिल्कुल न बनने की संभावना है.इस बेमौसम मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है और अब सभी की नजर आने वाले दिनों के मौसम पर टिकी हुई है.

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