कंगना बनाम कृति के जीवा विज्ञापन विवाद में ‘डबल स्टैंडर्ड’ की बहस क्यों
BY- ARSHITA SINGH
जीवा के रक्षाबंधन विज्ञापन को लेकर कंगना रनौत की आपत्ति के बीच उनका 2026 का नक्षत्र से जुड़ा रक्षाबंधन पोस्ट फिर चर्चा में है। सोशल मीडिया पर उपयोगकर्ता दोनों अभियानों की तुलना करते हुए सवाल उठा रहे हैं।
कृति सेनन के रक्षाबंधन विशेष जीवा विज्ञापन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सोशल मीडिया पर एक नई बहस में बदल गया है। कृति के विज्ञापन में उनके पहनावे और रक्षाबंधन जैसे पारंपरिक त्योहार की प्रस्तुति को लेकर सवाल उठे थे। इसी बीच कंगना रनौत ने भी विज्ञापन की आलोचना की थी। विवाद बढ़ने के बाद जीवा ने विज्ञापन वापस लेते हुए भारतीय संस्कृति और त्योहारों के प्रति सम्मान जताया था।
कंगना ने कृति के विज्ञापन पर क्या कहा?
कंगना रनौत ने कृति सेनन के जीवा विज्ञापन की प्रस्तुति पर सवाल उठाते हुए कहा था कि रक्षाबंधन जैसे त्योहार को विज्ञापन में भारतीय परंपराओं और भावनाओं को ध्यान में रखते हुए दिखाया जाना चाहिए। कंगना की टिप्पणी के बाद इस विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया पर बहस और तेज हो गई।
वहीं, कृति सेनन ने बिना किसी का नाम लिए सोशल मीडिया पर अपनी बात रखी थी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संस्कृति को केवल कपड़ों के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक परिवार, रिश्ते, भावनाएं और त्योहारों से जुड़ा प्यार भी संस्कृति का अहम हिस्सा हैं।
अब क्यों वायरल हो रहा है कंगना का पुराना नक्षत्र पोस्ट?

कृति और जीवा विवाद के बीच सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने कंगना रनौत का २०१७ का नक्षत्र आभूषण से जुड़ा रक्षाबंधन पोस्ट फिर से सामने ला दिया। रिपोर्टों के मुताबिक, इस पुराने प्रचारात्मक पोस्ट में कंगना आभूषण ब्रांड के रक्षाबंधन अभियान का हिस्सा थीं और कंधे से नीचे खुली पोशाक में नजर आई थीं।
पुराने पोस्ट के दोबारा वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर उपयोगकर्ता कंगना की मौजूदा टिप्पणी और उनके पुराने विज्ञापन के बीच तुलना कर रहे हैं। कुछ उपयोगकर्ता इसे ‘दोहरा मापदंड’ बता रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि दोनों विज्ञापनों का संदर्भ और समय अलग है, इसलिए इन्हें पूरी तरह एक जैसा मानना उचित नहीं होगा।
कंगना का नक्षत्र पोस्ट साल 2017 का है और वह मुख्य रूप से रक्षाबंधन प्रस्ताव से जुड़े प्रचारात्मक अभियान का हिस्सा था। वहीं, कृति सेनन का जीवा विज्ञापन मौजूदा रक्षाबंधन अभियान से जुड़ा था, जिस पर त्योहार की प्रस्तुति को लेकर विवाद खड़ा हुआ। इसलिए सोशल मीडिया पर दोनों की तुलना भले ही की जा रही हो, लेकिन दोनों अभियानों की परिस्थितियां और संदर्भ अलग-अलग हैं।
विवाद अब सिर्फ विज्ञापन तक सीमित नहीं

कृति सेनन के जीवा विज्ञापन के हटाए जाने के बाद बहस सिर्फ एक ब्रांड अभियान तक सीमित नहीं रही। अब चर्चा इस बात पर हो रही है कि विज्ञापनों में भारतीय त्योहारों और परंपराओं को किस तरह प्रस्तुत किया जाना चाहिए और आधुनिक फैशन को पारंपरिक त्योहारों के साथ किस सीमा तक जोड़ा जा सकता है।
एक तरफ आलोचकों का कहना है कि धार्मिक और सांस्कृतिक त्योहारों पर आधारित विज्ञापनों में उनकी भावनात्मक और पारंपरिक संवेदनशीलता का ध्यान रखा जाना चाहिए। दूसरी तरफ कृति के समर्थकों का तर्क है कि किसी महिला के कपड़ों को उसकी संस्कृति या मूल्यों का पैमाना बनाना सही नहीं है।
इसी बीच कंगना रनौत का पुराना नक्षत्र पोस्ट सामने आने से बहस को नया एंगल मिल गया है। सोशल मीडिया उपयोगकर्ता अब कृति सेनन के जीवा विज्ञापन और कंगना के पुराने अभियान को लेकर अपने-अपने सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, इन प्रतिक्रियाओं को सोशल मीडिया की राय के तौर पर ही देखा जाना चाहिए और दोनों मामलों के अलग-अलग संदर्भ को ध्यान में रखना जरूरी है।
फिलहाल, कृति सेनन का जीवा विज्ञापन विवाद बॉलीवुड और विज्ञापन जगत में त्योहारों की प्रस्तुति, फैशन और सांस्कृतिक संवेदनशीलता को लेकर जारी बहस का हिस्सा बना हुआ है। कंगना के पुराने नक्षत्र पोस्ट के वायरल होने के बाद इस विवाद ने सेलिब्रिटी टिप्पणी और कथित ‘दोहरे मापदंड’ की बहस को भी जन्म दे दिया है।
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