कुशीनगर में इल्मी दुनिया को बड़ा झटका: मौलाना अहमद कमाल नदवी मदनी का इंतिकाल, मुफ्ती अजमत हुसैन का ताज़ियती मजमून

कुशीनगर | सी न्यूज़ भारत

जिला कुशीनगर की इल्मी, दीनि और सामाजिक फिज़ा एक बड़े नुकसान से दोचार हो गई जब एक माया-ए-नाज़, बाफ़ैज़, निडर और बेबाक आलिम-ए-दीन हज़रत मौलाना अहमद कमाल अब्दुर्रहमान नदवी मदनी रह. 24 अप्रैल 2026, जुमे के दिन फ़ज्र की नमाज़ के बाद इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत हो गए।

उनकी वफ़ात को लेकर जमीयत उलेमा कुशीनगर के नायब सदर (जिला उपाध्यक्ष) मुफ्ती अजमत हुसैन ने गहरा दुख और अफसोस जाहिर करते हुए एक ताज़ियती व तास्सुराती मजमून पेश किया है। मुफ्ती अजमत हुसैन ने अपने मजमून में लिखा कि हज़रत मौलाना रह. की शख्सियत हमाजिहत थी। वह एक साहिब-ए-इल्म आलिम होने के साथ-साथ जरी और हक़गो क़ाइद, बेहतरीन कलमकार, संजीदा सहाफी और हालात-ए-हाज़िरा पर गहरी नजर रखने वाले मुफक्किर थे।

उनकी तहरीरों में जहां सच्चाई की जुरअतमंदाना अक्सबंदी होती थी, वहीं उम्मत के मसाइल का दर्द और इस्लाह की तड़प भी साफ झलकती थी। उन्होंने आगे लिखा कि मौलाना ने अपनी पूरी जिंदगी दीन की खिदमत, तबलीग, तदरीस और इस्लाह-ए-मुआशरा के लिए वक्फ कर दी थी। जिला कुशीनगर के कोने-कोने में उनकी इल्मी और दीनि सेवाओं को बड़े एहतराम के साथ याद किया जाता है।

उनके खिताबात में तासीर, तदरीस में गहराई और तहरीरों में फिक्री पुख्तगी साफ नजर आती थी। मजमून में यह भी जिक्र किया गया कि मौलाना अहमद कमाल नदवी मदनी जामिया उमर फारूक पपरहियां कसियां के बानी थे, जहां से बड़ी तादाद में तलबा ने दीनि उलूम हासिल किए।

बाद में उन्होंने अपने आबाई वतन में जामिया रहमानिया सिमरा हरदो कठकोइयां की बुनियाद रखी, जिसके तहत रहमानिया मिशन स्कूल समेत कई तालीमी और दीनि सरगर्मियां जारी रहीं।

मुफ्ती अजमत हुसैन ने लिखा कि मौलाना रह. ने जमीयत उलेमा कुशीनगर की सरपरस्ती में भी बेहतरीन खिदमात अंजाम दीं और अपनी कियादत से तंजीम को मजबूत किया। उनकी सबसे बड़ी खासियत हक़गोई थी—उन्होंने हमेशा बेबाकी से सच्चाई का साथ दिया और जुल्म के खिलाफ आवाज बुलंद की। उन्होंने अपने तास्सुरात में कहा कि मौलाना की रहालत से जो खला पैदा हुआ है, उसे भरना आसान नहीं। वह तालीम, तंजीम, तस्नीफ, सहाफत और दावत जैसे कई मैदानों में एक साथ काम कर रहे थे और हर जगह अपनी अलग पहचान रखते थे।

मुफ्ती अजमत हुसैन ने अपील की कि मौलाना के मिशन को आगे बढ़ाना ही उनके लिए असल खिराज-ए-अकीदत होगा। उनके कायम किए गए इदारों को मजबूत किया जाए और उनकी फिक्र को जिंदा रखा जाए। अंत में उन्होंने दुआ की कि अल्लाह तआला मरहूम की मगफिरत फरमाए, उनके दरजात बुलंद करे और तमाम अहल-ए-खानदान व मुतअल्लिकीन को सब्र-ए-जमील अता करे।

रिपोर्टर: राशिद बिल्लाह

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