लाल किले की प्राचीर से रचा गया नया इतिहास--- पूरा देश देख कर हुआ हैरान
लाल किले की प्राचीर से रचा गया नया इतिहास--पूरा देश देख कर हुआ हैरान
आज स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने न केवल झंदरोहन किया बल्कि एक बड़ा इतिहास भी रच दिया। जी हाँ आपको बता दूं कि लाल किले से ऐतिहासिक नजारा देखने को मिला जो आजादी के बाद पहली बार हुआ जिसने150 करोड़ देशवासियों के रोंगटे खड़े कर दिए! उनको हैरान कर दिया।
चलिए अब आपको बता ही देते हैं कि आज हमारे देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से एक ऐसा अभूतपूर्व इतिहास रच दिया गया है, जिसने पूरे देश को गर्व और रोमांच से सराबोर कर दिया है! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में लाल किले पर वो हुआ जो आजादी के 79 सालों में आज तक कभी नहीं हुआ था! जी हाँ आज लाल किले की प्राचीर पर पूरा वंदे मातरम्' गूंजा। आजादी के बाद इतिहास के पन्नों में पहली बार लाल किले की प्राचीर पर राष्ट्रगीत वंदे मातरम् का पूरा संस्करण आधिकारिक रूप से बजाया गया! जैसे ही राष्ट्रगीत की धुन हवा में तैरी पूरा लाल किला देशभक्ति के ज़बरदस्त जुनून से थर्रा उठा। राष्ट्रगीत के पूरे 150 साल पूरे होने के इस ऐतिहासिक मौके पर यह देशवासियों के लिए सबसे बड़ा तोहफा साबित हुआ! ये वो मौका है जब आजादी के बाद यह पहली बार है जब लाल किले पर पूरे वंदे मातरम् को बजाया गया है!
आज का स्वतंत्रता दिवस केवल एक समारोह नहीं था, बल्कि देश के कानून में हुए एक बहुत बड़े बदलाव का गवाह भी बना जब स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर वंदे मातरम्' को राष्ट्रगान के बराबर का दर्जा देते हुए उसके पूरे संस्करण को बजाया गया।
आपको बता दें कि कल भी 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्र के नाम संदेश की शुरुआत और समापन पर भी वन्देमातरम को बजाया गया था। हाल ही में 'वंदे मातरम्' के पूरे संस्करण को राष्ट्रगान के बराबर कानूनी सुरक्षा प्रदान की गई है और अब राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी मिलने के बाद अब राष्ट्रगीत के गायन में बाधा डालना या इसका अपमान करना भारी पड़ेगा। अब इसमें सख्त सजा का प्रावधान:भी कर दिया गया है ऐसा अपराध करने वाले को 3 साल तक की जेल, भारी जुर्माना या दोनों हो सकते हैं!
फ़िलहाल तमाम विरोध, बयानबाजी और हायतौबा के बाद वन्दे मातरम के पूरे संस्करण को आधिकारिक दर्जा मिल ही गया। और इस पर हो रहे बवाल पर मेरी तो केवल यही राय थी। जब हम राष्ट्रगान को पूरा सम्मान देते हुए पूरे गर्व और भक्तिभावना के साथ गाते है तो राष्ट्र गीत से परहेज क्यों। जैसे राष्ट्र गान वैसे ही राष्ट्र गीत। जिसमे केवल देश की बात है न कि किसी धर्म और जाति की।
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