बंदी राकेश कुमार अग्रवाल की गिरफ्तारी को गैरकानूनी करार देते हुए उनकी तत्काल रिहाई का आदेश

ललितपुर - उच्च न्यायालय ने एक अहम फैसले में बंदी राकेश कुमार अग्रवाल की गिरफ्तारी को गैरकानूनी करार देते हुए उनकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि संबंधित मामले में पारित रिमांड आदेश विधिसम्मत नहीं था, इसलिए उसे निरस्त किया जाता है और बंदी को तुरंत रिहा किया जाए। इस संबंध में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, ललितपुर द्वारा 28 अप्रैल 2026 को जिला कारागार अधीक्षक को निर्देश जारी करते हुए कहा गया कि उच्च न्यायालय इलाहाबाद में लंबित बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका संख्या 306/2026 (राकेश कुमार अग्रवाल बनाम राज्य) में 23 अप्रैल 2026 को पारित आदेश का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि रिहाई में किसी प्रकार की लापरवाही या देरी न हो। गिरफ्तारी पर उठे सवाल जानकारी के अनुसार, राकेश अग्रवाल को कोतवाली पुलिस ने धारा 103(1) के तहत गिरफ्तार किया था।

इस गिरफ्तारी को न्यायालय में चुनौती दी गई थी। सुनवाई के दौरान प्रस्तुत दस्तावेजों और अधिवक्ता के तकों के आधार पर उच्च न्यायालय ने पाया कि मु.अ.सं. 112/2026 में 31 जनवरी 2026 को पारित रिमांड आदेश विधिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं था। इसी आधार पर न्यायालय ने पूरी कार्रवाई को अवैध ठहराते हुए रिमांड आदेश को निरस्त कर दिया। जेल प्रशासन को कड़े निर्देश मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने जिला कारागार अधीक्षक को भेजे पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि न्यायालय के आदेश का प्राथमिकता के आधार पर पालन किया जाए। आदेश की अवहेलना पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका बनी राहत का आधार यह मामला बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (हैबियस कॉर्पस) के महत्व को भी

दर्शाता है। यह संवैधानिक प्रावधान किसी भी व्यक्ति को अवैध हिरासत से मुक्त कराने का प्रभावी माध्यम है। इसी याचिका के जरिए राकेश अग्रवाल को न्यायालय से राहत मिली। पृष्ठभूमिः हत्याकांड से जुड़ा विवाद मामला एक पुराने व्यापारिक विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है। छत्रसालपुरा निवासी कृपा सागर पटवा (35), जो कटरा बाजार में पगड़ी की दुकान चलाते थे, का नझाई बाजार निवासी प्रकाश अग्रवाल से करीब दो वर्षों से विवाद चल रहा था। बताया गया कि बातचीत के लिए बुलाए जाने पर प्रकाश ने कृपा सागर पर चाकू से हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद परिजनों ने पुलिस को सूचना दी थी। इस पूरे प्रकरण में अब उच्च न्यायालय के फैसले के बाद कानूनी स्थिति बदल गई है और राकेश अग्रवाल की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।

रिपोर्टर - संजय रजक

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