नई योजना के पहले दिन ही प्रदेश स्तरीय धरने पर बैठे ग्राम रोजगार सेवक, योजना हो रही प्रभावित

महरोनी /ललितपुर : मनरेगा योजना की रीढ़ माने जाने वाले योजना के तहत कार्य करने वाले ग्राम रोजगार सेवक व अन्य मनरेगा कार्मिक अपनी वाजिब मांगो को लेकर निरंतर मांग उठाते रहे लेकिन उनके हको की मांग को जिम्मेदार अफसरों ने सिर्फ हवा हवाई वायदो तक सीमित रखा।

मनरेगा का नाम परिवर्तित कर सरकार योजना को नई योजना के नाम से संचालित करने जा रही ही जिसकी औपचारिक शुरुआत एक जुलाई से हो चुकी लेकिन इस योजना मे कार्मिकों के हको को सुरक्षित करने का ठोस प्राविधान नजर नहीं आ रहा बल्कि ग्राम रोजगार सेवकों के लिए अपनी बेइज्जती महसूस हो रही है क्योंकि योजना मे मजदूरो की मजदूरी जिस हिसाब से तीन सौ की गयी उस हिसाब से रोजगार सेवक को दैनिक मानदेय नहीं बनता, मजदूर एक माह मे पायेंगे 9000 वहीं यह मजदूरों से कम 7000  प्रति माह भुगतान पा सकेंगे।
योजना को इतना हाईटेक कर दिया गया कि अल्प मानदेयभोगी यह कर्मचारी भले ही फ़टे कपड़ो मे खुद को भूखा रखें लेकिन बीस हजार का मोबाइल फोन अपडेट रखना होगा तभी इनकी नौकरी चल पायेगी, इन्हे न मानव संसाधन नीति के तहत लाभान्वित किया जा रहा न बढ़ती महंगाई के दौर मे मानदेय बढ़ोतरी की गयी है।
  ग्राम रोजगार सेवकों की स्थिति बदतर हो गयी है वह न बच्चों को पढ़ा पा रहे न बीमार परिजन को समुचित इलाज दिला पा रहे बल्कि कर्ज मे दबते चले जा रहे है।
कास 2021 मे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा लखनऊ मे आयोजित कार्यक्रम मे जिन घोषणाओ को रखा गया था यदि विभागीय अफसरों ने उन्हें पूरा कराया होता तो आज लखनऊ की सड़कों पर भीषण गर्मी मे धक्के नहीं खा रहे होते रोजगार सेवक।

रिपोर्टर : ऋषि

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