बरवासन धाम मन्दिर पर होगा विशेष गुरु पूजन
ललितपुर : बालाबेहट के माता बरवासन मन्दिर पर होगा विशेष पूजा श्री श्री 1008 श्री जगतगुरु रामानंद अचार्यआश्र। सिद्ध पीठवरबासनधाम परआयोजित होंगे धार्मिक आयोजन पंडित राम गोपाल देवलिया सेवा नेतृत्व प्रधान अध्यापक ने बताया कि
आज ही के दिन व्यास जी का जन्म आषाढ़ महीने की पूर्णिमा को हुआ था। अषाढ़ महीने की पूर्णिमा तिथि जगत गुरु माने जाने वाले महर्षि वेद व्यास को समर्पित है इस दिन गुरू पूजा की परंपरा होने से गुरू पूर्णिमा पर्व के रुप मैं मनाया जाता है वेदों के सार ब्रह्मसूत्र की रचना भी वेदव्यास ने इसी दिन की थी। वेद व्यास ने ही वेद ऋचाओं का संकलन कर वेदों को चार भागों में बांटा था। उन्होंने ही महाभारत, 18 पुराणों व 18 उप पुराणों की रचना की थी। इसलिए आषाढ़ महीने की पूर्णिमा पर गुरु के रूप में उनकी पूजा की जाती है भागवत महापुराण के अनुसार वेद व्यास जी भगवान विष्णु के 17वें अवतार थे।महर्षि वेद व्यास अष्टचिरंजिवीयों में एक हैं। यानी अमर होने के कारण कलयुग में भी जीवित हैं।महर्षि वेद व्यास के पिता महर्षि पाराशर और माता सत्यवती थीं महर्षि व्यास ने वेदों के ज्ञान को बांटा। इसलिए इनका नाम वेदव्यास पड़ा महाभारत जैसे श्रेष्ठ ग्रंथ की रचना भी इन्होंने ही की है।
महर्षि वेदव्यास ने एक द्वीप पर तप किया था। तप की वजह से इसका रंग श्याम हो गया। इसी वजह से इन्हें कृष्णद्वेपायन कहा जाने लगा।पैल, जैमिन, वैशम्पायन, सुमन्तु मुनि, रोमहर्षण आदि महर्षि वेदव्यास के महान शिष्य थे।
रिपोर्टर : महेश नगाइच
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