मकर संक्रांति की रौनक से गुलजार हुए लातेहार जिले के बाजार, चूड़ा–गुड़ और तिलकुट की जमकर बिक्री
लातेहार : सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के पावन पर्व मकर संक्रांति को लेकर लातेहार जिले के सभी प्रखंडों में उत्साह और उमंग का माहौल देखने को मिल रहा है। पर्व से एक-दो दिन पूर्व ही जिले के बाजारों में जबरदस्त चहल-पहल शुरू हो गई है। लातेहार, चंदवा, बालूमाथ, गारु, बरवाडीह सहित तमाम प्रखंड मुख्यालयों और साप्ताहिक हाट-बाजारों में लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। हर ओर रौनक, खरीदारी और त्योहार की खुशबू साफ महसूस की जा रही है।
मकर संक्रांति का पर्व मुख्य रूप से चूड़ा, गुड़, तिल और उससे बने व्यंजनों से जुड़ा होता है। यही कारण है कि बाजारों में सबसे अधिक मांग चूड़ा, गुड़, तिल के लड्डू, तिलकुट, लाई, खाजा और मिठाइयों की देखी जा रही है। दुकानों पर सुबह से देर शाम तक ग्राहकों की भीड़ लगी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक लोग अपने परिवार और रिश्तेदारों के लिए पर्व की तैयारी में जुटे हैं।
लातेहार मुख्य बाजार में चूड़ा और गुड़ की अस्थायी दुकानों की कतारें लगी हुई हैं। वहीं चंदवा और बालूमाथ बाजार में स्थानीय उत्पादों के साथ-साथ बाहर से आए तिलकुट और मिठाइयों की भी खूब बिक्री हो रही है। बरवाडीह और गारु के साप्ताहिक बाजारों में तो ग्रामीण इलाकों से आए लोग बड़ी मात्रा में चूड़ा-गुड़ की खरीदारी करते नजर आए। कई स्थानों पर किसानों द्वारा स्वयं तैयार किया गया नया चूड़ा और देसी गुड़ भी बिक रहा है, जिसकी मांग खास तौर पर अधिक है।
व्यापारियों के अनुसार इस वर्ष मकर संक्रांति को लेकर बाजार में अच्छी बिक्री हो रही है। चूड़ा की कीमत गुणवत्ता के अनुसार 40 से 70 रुपये प्रति किलो तक है, जबकि गुड़ 50 से 80 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। तिल के लड्डू और तिलकुट की कीमत भी आकार और गुणवत्ता के अनुसार तय की गई है। मिठाई दुकानदारों का कहना है कि संक्रांति पर तिल से बने व्यंजनों की परंपरा के कारण उनकी बिक्री में सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ोतरी हुई है।
ग्राहकों का कहना है कि मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं, बल्कि पारंपरिक खान-पान और आपसी मेल-जोल का त्योहार है। इस दिन लोग स्नान-दान कर चूड़ा-गुड़ और तिल का सेवन करते हैं तथा बड़े-बुजुर्गों से आशीर्वाद लेते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह पर्व सामूहिक रूप से मनाया जाता है, जहां घर-घर चूड़ा-गुड़ बांटने की परंपरा आज भी जीवित है।
बाजारों में बढ़ी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और स्थानीय पुलिस भी सतर्क नजर आ रही है। प्रमुख बाजारों में यातायात व्यवस्था बनाए रखने और भीड़ नियंत्रण के लिए पुलिस की तैनाती की गई है। दुकानदारों को भी सड़क पर अतिक्रमण न करने की हिदायत दी गई है, ताकि ग्राहकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
कुल मिलाकर मकर संक्रांति को लेकर लातेहार जिले में उत्सव का माहौल है। बाजारों की रौनक यह साफ दर्शा रही है कि परंपराएं आज भी लोगों के जीवन में गहराई से जुड़ी हुई हैं। चूड़ा, गुड़ और तिल की खुशबू के साथ मकर संक्रांति का पर्व जिले में सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक विरासत का संदेश दे रहा है।
रिपोर्टर : बब्लू खान

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