चतरा करमटांड़ जंगल में एयर एंबुलेंस क्रैश, एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत

चतरा : चतरा जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र अंतर्गत करमटांड़ जंगल में हुए दर्दनाक एयर एंबुलेंस हादसे ने लातेहार जिले के चंदवा क्षेत्र के एक परिवार को पूरी तरह तबाह कर दिया। इस भीषण दुर्घटना में संजय साव, उनकी पत्नी अर्चना देवी और उनके भांजे ध्रुव कुमार की मौत हो गई। एक ही परिवार के तीन लोगों की असमय मौत से पूरे इलाके में मातम पसरा है। गांव से लेकर बाजार तक हर आंख नम है और हर जुबान पर सिर्फ एक ही सवाल—आखिर इस परिवार का कसूर क्या था?

संजय साव मूल रूप से लातेहार जिले के चंदवा थाना क्षेत्र अंतर्गत रखात गांव के निवासी थे। वर्तमान में वे पलामू जिले के बकोरिया में नेशनल हाईवे किनारे लाइन होटल का संचालन करते थे। परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी। लगभग एक सप्ताह पहले उनके होटल में शॉर्ट सर्किट के कारण भीषण आग लग गई थी, जिसमें वे गंभीर रूप से झुलस गए थे। उन्हें तत्काल इलाज के लिए देवकमल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर बनी रहने पर चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए दिल्ली रेफर करने की सलाह दी।
परिजनों ने बताया कि संजय साव को बचाने की हर संभव कोशिश की जा रही थी। परिवार ने करीब 8 लाख रुपये खर्च कर एयर एंबुलेंस बुक की। सोमवार की शाम करीब 7 बजे रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से एयर एंबुलेंस ने दिल्ली के लिए उड़ान भरी। संजय के साथ उनकी पत्नी अर्चना देवी और भांजा ध्रुव कुमार भी थे। लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था। देर रात खबर आई कि चतरा के करमटांड़ जंगल में एयर एंबुलेंस दुर्घटनाग्रस्त हो गई है। इस हादसे में तीनों की जान चली गई।
दरअसल, 16 फरवरी को लाइन होटल में खाना बनाने के दौरान आग लग गई थी। स्थानीय लोगों के अनुसार होटल में ज्वलनशील पदार्थ रखे होने के कारण आग तेजी से फैल गई। संजय साव उस दिन होटल पहुंचे थे और खाना बनाने में मदद कर रहे थे। अचानक शॉर्ट सर्किट से आग भड़क उठी और वे बुरी तरह झुलस गए। सूचना मिलते ही सतबरवा थाना पुलिस और दमकल की टीम मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। थाना प्रभारी विश्वनाथ राणा ने भी आग लगने की पुष्टि की थी।
संजय साव के जीवन में यह पहली त्रासदी नहीं थी। वर्ष 2004 में नक्सलियों ने उनके पिता की हत्या कर दी थी। उस समय परिवार पूरी तरह टूट गया था। पिता के निधन के बाद परिवार चंदवा आकर रहने लगा। धीरे-धीरे संजय ने खुद को संभाला और बकोरिया में होटल व्यवसाय शुरू किया। कठिन परिश्रम से उन्होंने परिवार को फिर से खड़ा किया। लॉकडाउन के बाद होटल की स्थिति कमजोर हो गई थी, फिर भी वे संघर्ष करते रहे।
लेकिन नियति ने एक बार फिर इस परिवार को गहरा जख्म दे दिया। होटल में आग की घटना से वे जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे थे। परिवार को उम्मीद थी कि दिल्ली में इलाज से उनकी जान बच जाएगी। परंतु एयर एंबुलेंस हादसे ने सारी उम्मीदें खत्म कर दीं।
इस दुर्घटना ने संजय साव के दो नाबालिग बच्चों को एक साथ अनाथ बना दिया। उनके सिर से मां और पिता दोनों का साया उठ गया। घर में अब सिर्फ सन्नाटा है। मृतक के दादा बालेश्वर साहू का रो-रोकर बुरा हाल है। मां घटना की खबर सुनते ही बेसुध हो गईं। परिजन और ग्रामीण उन्हें ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इस अपूरणीय क्षति की भरपाई संभव नहीं।
गांव के लोग बताते हैं कि संजय मिलनसार और मेहनती युवक थे। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी। पिता की हत्या के बाद परिवार को संभालना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने जिम्मेदारी उठाई। आज वही परिवार फिर से बिखर गया है।
एयर एंबुलेंस हादसे की खबर फैलते ही चंदवा और बकोरिया क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। स्थानीय लोगों ने और कई  समाज सेवी नेताओं ने प्रशासन से इस हादसे की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही पीड़ित परिवार को मुआवजा और बच्चों के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
करमटांड़ जंगल में हुई यह दुर्घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक परिवार के सपनों का अंत है। बेहतर इलाज की उम्मीद में भरी गई उड़ान अब एक दर्दनाक स्मृति बन चुकी है। पीछे छूट गए हैं मासूम बच्चे, बिलखते बुजुर्ग और एक ऐसा घर, जहां अब हमेशा के लिए सन्नाटा पसरा रहेगा।
बता दें कि एयर एंबुलेंस में कुल 7 लोग सवार थे. इनमें एक पायलट, एक को-पायलट, एक नर्सिंग स्टाफ, एक डॉक्टर, एक मरीज और दो अटेंडेंट शामिल थे.

कैप्टेन विवेक विकास भगत, पायलट
कैप्टेन सवराजदीप सिंह, पायलट
संजय कुमार, मरीज
अर्चना देवी, तीमारदार
धीरू कुमार, तीमारदार
डॉ. विकास कुमार गुप्ता, डॉक्टर
सचिन कुमार मिश्रा, पारामेडिक स्टाफ.

एयर एंबुलेंस हादसे के बाद 3 किमी तक बिखरा मलबा, ब्लैक बॉक्स से खुलेगा राज


चतरा जिले में हुए एयर एंबुलेंस हादसे के बाद घटनास्थल पर बेहद विचलित कर देने वाला दृश्य सामने आया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दुर्घटनाग्रस्त विमान का मलबा मुख्य स्थल से लगभग 2 से 3 किलोमीटर के दायरे में बिखरा मिला। जंगल और आसपास के इलाकों में जहां-जहां टुकड़े दिखाई दिए, ग्रामीणों ने उन्हें सावधानीपूर्वक एकत्र कर प्रशासन को सौंपा और मुख्य घटनास्थल तक पहुंचाने में सहयोग किया।

मलबे के इतने बड़े क्षेत्र में फैलाव को देखते हुए प्रारंभिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि विमान में हवा में ही किसी तकनीकी खराबी या विस्फोट जैसी स्थिति उत्पन्न हुई होगी। हालांकि हादसे के वास्तविक कारणों का खुलासा आधिकारिक जांच रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगा।

सूत्रों के मुताबिक भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की टीम दिल्ली से घटनास्थल के लिए रवाना हो चुकी है। टीम द्वारा स्थल निरीक्षण, मलबे की तकनीकी जांच और साक्ष्यों का संग्रह किया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लैक बॉक्स मिलने के बाद ही दुर्घटना के कारणों पर स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। फिलहाल प्रशासन ने पूरे क्षेत्र को घेराबंदी कर सुरक्षित कर दिया है और लोगों से अफवाहों से दूर रहने की अपील की है।


 मरीजों की जिंदगी बचाने निकले डॉ. विकास कुमार गुप्ता की आखिरी उड़ान बनी दर्दनाक विदाई


झारखंड की राजधानी रांची से दिल्ली जा रही रेड बर्ड एयरवेज की एयर एंबुलेंस सोमवार देर शाम चतरा जिले में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हृदय विदारक हादसे में सात लोगों की जान चली गई। मृतकों में बिहार के औरंगाबाद जिले के मदनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत मेनका गांव निवासी एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. विकास कुमार गुप्ता भी शामिल हैं। उनके असमय निधन से चिकित्सा जगत, परिवार और पैतृक गांव में गहरा शोक व्याप्त है।डॉ. विकास कुमार गुप्ता वर्षों से रांची में रहकर सेवा दे रहे थे। वे रांची सदर अस्पताल में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत थे और गंभीर मरीजों के इलाज में उनकी अहम भूमिका रहती थी। आपातकालीन चिकित्सा निकासी अभियानों में वे सक्रिय रूप से जुड़ते थे और कई जिंदगियां बचाने में योगदान दे चुके थे। बताया जाता है कि हादसे से ठीक एक दिन पहले उन्होंने सेना के एक जवान को सुरक्षित एयरलिफ्ट कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पूर्व में चंदवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थापित रह चुके थे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था—मरीजों को नई जिंदगी देने वाला यह डॉक्टर खुद जिंदगी की जंग हार गया।
उनकी पत्नी भारतीय स्टेट बैंक की कचहरी शाखा में कार्यरत हैं। उनका आठ वर्ष का एक मासूम बेटा है, जिसके सिर से पिता का साया उठ गया। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। रांची के चिकित्सकों, अस्पताल कर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने डॉ. गुप्ता के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। सभी ने उन्हें एक समर्पित, संवेदनशील और कर्तव्यनिष्ठ चिकित्सक बताया।
पैतृक गांव मेनका में भी मातम पसरा है। गांव के लोग गर्व से कहते थे कि उनका बेटा दूर शहर में रहकर लोगों की जान बचा रहा है। अब वही गांव शोक में डूबा है। हर आंख नम है और हर जुबान पर यही सवाल है कि आखिर एक जीवनरक्षक डॉक्टर की ऐसी दर्दनाक विदाई क्यों?
डॉ. विकास कुमार गुप्ता की आखिरी उड़ान अब एक ऐसी स्मृति बन गई है, जो हमेशा उनके साहस, समर्पण और सेवा भाव की कहानी सुनाती रहेगी। मरीजों की जिंदगी बचाने निकले इस डॉक्टर की शहादत चिकित्सा सेवा के प्रति उनकी निष्ठा का अमिट प्रतीक बन गई है।

* पायलट विकास भगत उर्फ सोनू , घर का इकलौता बेटा था

इस दर्दनाक एयर एंबुलेंस हादसे ने कई परिवारों को गहरा जख्म दिया है। इस हादसे में पायलट विकास भगत उर्फ सोनू की भी मौत हो गई। वे पंडुका कुंदरी लुटी गांव के निवासी थे और अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र थे। उनके परिवार में एक बहन भी हैं। बेटे की असमय मौत की खबर मिलते ही गांव में शोक की लहर दौड़ गई।बताया जा रहा है कि उनके पिता देव सहाय भगत आरयू विभाग में स्कूटी इंजीनियर के पद पर चतरा और हजारीबाग में पदस्थापित हैं। इकलौते बेटे को खोने का दुख परिवार के लिए असहनीय है। गांव के लोग बताते हैं कि सोनू बचपन से ही होनहार और मिलनसार थे। आसमान में उड़ान भरने का उनका सपना आज हमेशा के लिए थम गया। घर में अब सन्नाटा और आंखों में सिर्फ आंसू हैं।

रिपोर्टर : बब्लू खान 

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