अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर चंदवा में गूंजा महिलाओं के अधिकार का स्वर
लातेहार : अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रविवार को झारखंड दैनिक मजदूर यूनियन के बैनर तले चंदवा स्थित सरहुल मैदान में एक भव्य सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी देखने को मिली। सभा की अध्यक्षता पार्वती देवी ने की, जबकि कार्यक्रम का संचालन सविता देवी ने किया। इस अवसर पर महिलाओं के अधिकार, सम्मान और सशक्तिकरण को लेकर जोरदार तरीके से अपनी बात रखी गई। सभा को संबोधित करते हुए झारखंड दैनिक मजदूर यूनियन के अध्यक्ष प्रमोद साहू ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के इतिहास और महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्ष 1910 में क्लारा जेटकिन नामक जर्मन महिला समाजसेवी और नेता ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की नींव रखी थी। यह दिवस मूल रूप से कामगार महिलाओं के आंदोलन से प्रेरित होकर शुरू हुआ था। बाद में वर्ष 1975 में संयुक्त राष्ट्र ने इसे आधिकारिक रूप से वार्षिक आयोजन के रूप में मान्यता दी, जिसके बाद से यह दिन पूरी दुनिया में महिलाओं के अधिकार और सम्मान के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।प्रमोद साहू ने कहा कि महिलाएं कभी कमजोर नहीं होतीं, बल्कि उन्हें अपनी शक्ति और पहचान को समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल महिलाओं का अधिकार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। 8 मार्च का दिन हमें महिलाओं के अद्भुत योगदान, उनके संघर्ष और समाज के निर्माण में उनकी भूमिका की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि महिला दिवस केवल उत्सव मनाने का दिन नहीं है, बल्कि यह समाज को यह सोचने का अवसर देता है कि महिलाओं के बिना कोई भी समाज पूर्ण नहीं हो सकता।उन्होंने कहा कि आज भी समाज में कई स्थानों पर महिलाओं के साथ भेदभाव और अत्याचार की घटनाएं सामने आती हैं। दहेज के लिए महिलाओं को प्रताड़ित किया जाना और कई मामलों में उन्हें जला दिया जाना आज भी एक गंभीर सामाजिक समस्या बनी हुई है। इसके अलावा महिलाओं के साथ शोषण और हिंसा की घटनाएं भी चिंता का विषय हैं। ऐसे में समाज के हर वर्ग को आगे आकर महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करनी होगी और उन्हें सम्मानजनक जीवन देने की दिशा में कार्य करना होगा।श्री साहू ने सरकार द्वारा चलाए जा रहे “बेटी पढ़ाओ, बेटी बढ़ाओ” अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि इस नारे को केवल कागजों तक सीमित रखने के बजाय धरातल पर पूरी ईमानदारी के साथ लागू करने की जरूरत है। इसके लिए सरकारी अधिकारियों और समाज के सभी वर्गों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने महिलाओं से आह्वान किया कि वे संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं और लाल झंडे के तले एकजुट होकर संघर्ष करें।सभा के पश्चात सरहुल मैदान से महिलाओं की एक जागरूकता रैली निकाली गई। रैली में शामिल महिलाएं अपने अधिकारों और समानता के संदेश के साथ शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरीं। रैली सरहुल मैदान से निकलकर इंदिरा चौक, मुख्य बाजार, सुभाष चौक और कंचन नगरी होते हुए मजदूर यूनियन कार्यालय श्री रामजतन भवन पहुंचकर समाप्त हुई। पूरे मार्ग में महिलाओं ने एकजुटता और अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।
रैली का नेतृत्व लक्ष्मी देवी,किरण देवी,मंजू देवी,नैना देवी,सुमति देवी,कमली देवी,रूपा देवी,लीला देवी,रामप्यारी देवी,मीना देवी,सरिता देवी,इतवारिया देवी,झालो देवी,जसवंती देवी,पुष्पा देवी,अनीता देवी और प्रमिला देवी ने किया। इनके साथ बड़ी संख्या में महिलाएं रैली में शामिल होकर महिला सशक्तिकरण का संदेश देती नजर आईं। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने यह भी कहा कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उनके सम्मान की स्थापना के लिए समाज में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। जब तक समाज में महिलाओं के प्रति सकारात्मक सोच विकसित नहीं होगी, तब तक वास्तविक महिला सशक्तिकरण संभव नहीं हो पाएगा।इस आयोजन के माध्यम से महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने और समाज में समानता, सम्मान तथा न्याय का संदेश देने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं ने संकल्प लिया कि वे समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाएंगी और आने वाली पीढ़ी के लिए एक बेहतर और समानता पर आधारित समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएंगी।
रिपोर्टर - बब्लू खान
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