खरवार भोगता समाज ने नीलांबर पीताम्बर की 168 वीं शहादत दिवस पर जल, जंगल जमीन बचाने का संकल्प लिया
बालूमाथ : शनिवार को बलूमाथ प्रखंड कार्यालय के समीप स्थित प्रथम स्वतंत्रता सेनानी 1857 के वीर शहीद नीलांबर -पीतांबर शाही भोगता कि 168 वीं शहादत दिवस पारम्परिक रीती रिवाज के साथ मनाया गया। खरवार भोगता समाज के प्रेम गंझू ने बताया कि 10 जनवरी 1823 को गढ़वा के भंडरिया प्रखंड क्षेत्र के चेमूसेनिया गाँव मे जन्मे जुड़वा भाई जिनके पिता चेमू सिंह जागीरदार थे। जब पुरे भारत मे प्रथम स्वतंत्रता की संग्राम लड़ी जा रही थी तब नीलांबर-पीतांबर ने पलामू की धरती मे खरवार, चेरो, भोगताओं को संगठित कर अंग्रेजो के खिलाफ जल, जंगल, जमीन अपने हक अधिकार के लड़ाई लड़ी। दोनों भाई गुरिला युद्ध मे निपुण थे। अंग्रेजो के काफी प्रयास के बाद भी इन दोनों भाइयों को गिरफ्तार करने मे असफल रहे। इन दोनों भाइयों को पकड़वाने, सूचना देने एवं गिरफ्तार करने पर ईनाम कि घोषणा किया गया था, पर सभी प्रयास असफल रहा. पर यह ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाया। 28 मार्च 1857 को अपने मेहमान के घर भोज कार्यक्रम की आयोजन किया गया था। और उसी भोज कार्यक्रम मे शामिल होने दोनों भाई रात्रि को पहुँचे थे। इसी मे इसकी सुचना अंग्रेजो को मिल गई और दोनों भाई को गिरफ्तार कर लेस्लीगंज पुलिस छावनी लाया गया और बगैर मुकदम्मा चलाये रातोरात बरगद के पेड़ मे फांसी दे दी गई। उनके शवों को एक कुवें मे डाल कर छुपा दिया गया था। इन सारी बातों कि जानकारी खरवार भोगता समाज विकास संघ के संस्थापक स्व रामदेव गंझु को पलामू गजेटियर से प्राप्त हुवा और पुरे झारखण्ड मे घूमघूम कर इनके वीर गाथा की प्रचार प्रसार की। पुरे झारखण्ड मे हीं नहीं बल्की भारत मे जहाँ खरवार भोगता निवास करते हैं, उन सभी राज्यों मे बड़ी धूमधाम से नीलांबर पीतांबर शहादत दिवस मनाई जा रही है। हम उनके वंश हैं, और हम सबों ने 168 वीं शहादत कि श्रधांजलि अर्पित कर यह प्रण लिया कि जिस जल, जंगल, जमीन कि लड़ाई लड़ते झारखण्ड के हजारों वीर पुरुष -महिला शहीद हो गए। देश को आजादी मिली, पर आज भी हमारी जल, जंगल, जमीन संकट मे है। ऐसे मे हम सभी को वीर नीलांबर पीतांबर से प्रेरणा लेकर उनके मार्ग मे चलना चाहिए। सैंकड़ो समाजिक, राजनितिक कार्यकर्त्ता शामिल हुए।
रिपोर्टर : मो० अरबाज

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