आदिम जनजातियों का निवाला हो रहा है गबन.... मृत लाभुक भी उठा रहे हैं राशन
लातेहार - गारू प्रखंड में राशन वितरण व्यवस्था को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। लगातार सामने आ रहे तथ्यों से यह संकेत मिल रहा है कि आदिम जनजातियों (पीवीटीजी) के नाम पर ऑनलाइन सिस्टम में नियमित राशन उठाव दिखाया जा रहा है, जबकि वास्तविक लाभुकों तक अनाज पहुंच ही नहीं रहा है। इससे साफ है कि कागजों में वितरण पूरा दिखाकर जमीनी स्तर पर गड़बड़ी की जा रही है। मायापुर पंचायत के रामसेली गांव में यह मामला उजागर हुआ है। आरोप है कि प्रभारी प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी साकेत यादव या उनसे जुड़े डीलर द्वारा ‘केवाईसी अपडेट नहीं होने’ का हवाला देकर कई कार्डधारियों को लंबे समय से राशन नहीं दिया जा रहा है। विडंबना यह है कि जिन परिवारों को महीनों से राशन नहीं मिला, उनके नाम पर हर महीने सरकारी पोर्टल में अनाज उठाव दर्ज हो रहा है, जबकि राशन कार्ड में ऑफलाइन एंट्री तक नहीं की गई है।
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार मार्च 2026 में प्रखंड के 643 पीवीटीजी कार्डधारियों के बीच 100 प्रतिशत राशन वितरण दिखाया गया है। इसमें 21,469 किलो चावल और 91 किलो गेहूं बांटने का दावा किया गया है। लेकिन रामसेली ग्राम के टोला हेठडीह में सामने आए मामलों ने इस दावे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और यह दर्शाता है कि सिस्टम में बड़े स्तर पर गड़बड़ी हो रही है। गांव के सोहन बिरजिया, अरविंद बिरजिया और विनय बिरजिया बताते हैं कि राशन नहीं मिलने से कई परिवारों की स्थिति खराब हो गई है। पितरूस बिरजिया को रोजी-रोटी के लिए केरल पलायन करना पड़ा। वहीं फूलो देवी की मृत्यु पांच वर्ष पहले हो चुकी है, लेकिन उनके राशन कार्ड पर दर्ज आश्रित सिरिल बिरजिया और सिलवंती देवी आज भी राशन से वंचित हैं। डीलर और संबंधित अधिकारी लगातार केवाईसी का हवाला देकर राशन नहीं दे रहे हैं। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार पितरूस बिरजिया ने 14 फरवरी और 15 मार्च को 35-35 किलोग्राम अनाज प्राप्त किया है, जबकि उन्होंने बताया कि उन्हें पिछले दो वर्षों से राशन नहीं दिया गया है। उनके पास मौजूद राशन कार्ड की हार्ड कॉपी में भी वितरण दर्ज नहीं है।
इसी तरह मृतक फूलो देवी के नाम पर 14 फरवरी और 15 मार्च 2026 को 35-35 किलोग्राम अनाज की निकासी दर्ज है, जबकि उनके परिवार के सदस्य पिछले कई महीनों से बाहर मजदूरी कर रहे हैं। इसके बावजूद लगातार उनके नाम पर राशन उठाव दिखाया जा रहा है। इस पूरे मामले पर जिला आपूर्ति पदाधिकारी ने गंभीरता जताते हुए कहा है कि आदिम जनजातियों को राशन निकासी कर नहीं देना बेहद गंभीर मामला है। पीवीटीजी का राशन वितरण एमओ की निगरानी में और उसके ही लॉगिन होना अनिवार्य है और पूरे मामले की जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
रिपोर्टर - बब्लू खान

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