लावालौंग में वन विभाग के द्वारा पुलिया निर्माण में जंगल के पत्थरों को खपाई जा रही है

लावालौंग :  प्रखण्ड में एक ओर वन संपदा और वन्य जीव के संरक्षण की जिम्मेदारी वन विभाग के कंधों पर है। वहीं लावालौंग में स्वयं वन विभाग के द्वारा कराए जा रहे पुलिया निर्माण में अवैध पत्थर का उपयोग किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। नियमों की अनदेखी करते हुए वनरक्षक अमित कुमार ने पुलिया निर्माण कार्य में जंगलों से अवैध रूप से पत्थर निकलवा रहे हैं जो सीधे तौर पर वन अधिनियम का उल्लंघन है। ज्ञात हो कि लावालौंग प्रखंड क्षेत्र के चानी तथा कदहे गांव नजदीक वन विभाग के द्वारा एक पुलिया का निर्माण किया जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार निर्माण कार्य के लिए आवश्यक पत्थर और बालू को किसी स्वीकृति खदान से ना खरीदकर पास के घने जंगल के प्रतिबंधित क्षेत्र से अवैध खनन करके ट्रैक्टर से लाया जा रहा है, जो जंगलों को काफी नुकसान पहुंचाई जा रहे है। निर्माण कार्य में घटिया सामग्री भी लगाई जा रही है तथा स्थानीय मजदूर न रखकर बाहरी मजदूर से कार्य की जा रही है। इससे साफ कहा जा रहा है कि कार्य में घटिया सामग्री की भंडाफोड़ होने की साक्ष्य छुपाने के लिए बाहरी मजदूरों से निर्माण कार्य में कार्य करवाया जा रहा है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि जब आम लोग सूखी लकड़ी लेने जंगल में जाते हैं, तो वन कर्मी भारी जुर्माना और कार्रवाई की धमकी देते हैं, लेकिन अब वन विभाग के ही पदाधिकारी नियमों को ताक पर रखकर अवैध कार्यों को अंजाम दे रहे हैं। जंगल से पत्थर निकालने के कारण जंगल के वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा है, ग्रामीणों का एक और गंभीर आरोप है कि इसी पुलिया को वनरक्षक अमित कुमार के द्वारा एक वर्ष पूर्व भी निर्माण करवाया गया था, जो एक वर्ष के अंतर्गत हीं पुलिया धराशाही हो गया। इस संबंध में वनपाल रवि नायक से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि इसकी मुझे जानकारी नहीं है, लेकिन जंगलों से पत्थर नहीं बल्कि माइंस से पत्थर को लगाना है, अगर ऐसा वनरक्षक करते हैं, तो उनके ऊपर उचित कार्रवाई की जाएगी।

रिपोर्टर : मो0 साजिद

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