लापरवाही का गड्ढा: NH-39 पर बनता पुल या बनता मौत का जाल
लातेहार : जिले के चंदवा थाना क्षेत्र में एनएच-39 पर बोरसीदाग गांव के पास रविवार को हुआ सड़क हादसा कोई साधारण दुर्घटना नहीं है, बल्कि यह सीधे-सीधे लापरवाही की उस तस्वीर को उजागर करता है, जिसे हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं—जब तक कोई बड़ा हादसा हमें झकझोर न दे।एक बोलेरो (जेएच 03 एएस/9859) निर्माणाधीन पुल के गड्ढे में जा पलटी। इस हादसे में चार महिलाओं समेत छह लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। ये सभी लोग एक शादी समारोह से लौट रहे थे—खुशी का सफर अचानक दर्द और अफरा-तफरी में बदल गया। रीना कुमारी और पिंकी कुमारी की हालत इतनी गंभीर है कि उन्हें रिम्स रांची रेफर करना पड़ा, जबकि अन्य घायलों का इलाज लातेहार में चल रहा है।
सवाल यह है कि आखिर कब तक सड़कें यूं ही लोगों की जान लेती रहेंगी?
यह पहला मामला नहीं है। महज कुछ दिन पहले, 23 अप्रैल को भी इसी स्थान पर एक एक्सयूवी 700 वाहन इसी अधूरे पुल में गिर गया था। तब भी लोग घायल हुए थे। तब भी सवाल उठे थे। लेकिन जवाब? आज तक नहीं मिला।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस जगह पर इतना बड़ा निर्माण कार्य चल रहा है, वहां न तो कोई बैरिकेडिंग है, न कोई चेतावनी बोर्ड और न ही कोई सुरक्षा संकेत। यानी सड़क पर चलने वाला आम इंसान पूरी तरह अंधेरे में है—उसे पता ही नहीं कि आगे मौत खड़ी है।
क्या यह सिर्फ एक “दुर्घटना” है? या फिर यह एक सुनियोजित लापरवाही है?
निर्माण एजेंसी की जिम्मेदारी तय क्यों नहीं होती? प्रशासन की निगरानी कहां है? जब एक बार हादसा हो चुका था, तो सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं किए गए? क्या किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार किया जा रहा है?यह हादसा सिर्फ छह लोगों की पीड़ा नहीं है, यह पूरे सिस्टम पर एक बड़ा सवाल है। ग्रामीणों का आक्रोश जायज है। वे पूछ रहे हैं कि जब पुल बन रहा है, तो क्या लोगों की जान की कीमत पर?
आज जरूरत है कि इस घटना को एक सामान्य खबर मानकर भुलाया न जाए, बल्कि इसे एक चेतावनी के रूप में देखा जाए। प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करते हुए निर्माण स्थल पर बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था करनी चाहिए। साथ ही जिम्मेदार एजेंसी पर सख्त कार्रवाई भी जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोहराई न जाए।
क्योंकि सड़कें विकास का प्रतीक होती हैं, मौत का रास्ता नहीं।
रिपोर्टर : बब्लू खान


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