उच्च न्यायालय के आदेश को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप

झामुमो नेता सौरभ श्रीवास्तव ने लगाया कंपनी पर माननीय उच्च न्यायालय के आदेश को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप


लातेहार -जिला मुख्यालय लातेहार में विगत कई दिनों से चर्चा में रहे तेतरियाखांड कोल परियोजना विवाद को लेकर आज एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता आयोजित की गई। तेतरियाखांड रैयत एवं विस्थापित मंच द्वारा आयोजित इस प्रेस वार्ता में झारखंड मुक्ति मोर्चा के युवा नेता सौरभ श्रीवास्तव मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए सौरभ श्रीवास्तव ने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय ने तेतरियाखांड परियोजना में हाईवा परिचालन का आदेश नहीं दिया है, बल्कि केवल प्रदूषण नियंत्रण सुनिश्चित करने को लेकर निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना संचालित करने वाली कंपनी न्यायालय के आदेश को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत कर आर्थिक लाभ कमाने की कोशिश कर रही है तथा आम जनता को भ्रमित किया जा रहा है कि न्यायालय ने हाईवा के माध्यम से कोयला उठाव की अनुमति दे दी है।

सौरभ ने कहा कि एक ओर क्षेत्र के बेरोजगार युवक रोजगार और जीविका की तलाश में संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कंपनियां उन्हें ईडी, सीबीआई और न्यायालय का भय दिखाकर मनमाने ढंग से खनन कार्य करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि प्रभावित ग्रामीणों और युवाओं को झूठे मुकदमों में फंसाने तथा कोर्ट तक घसीटने की धमकियां दी जा रही हैं, जिससे क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है।

उन्होंने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा परियोजना संचालन के लिए निर्धारित शर्तों का हवाला देते हुए कहा कि मंत्रालय ने 18 बिंदुओं पर अनुमति प्रदान की थी, लेकिन परियोजना संचालन के दौरान किसी भी शर्त का समुचित पालन नहीं किया गया। वन संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा, जल स्रोतों के संरक्षण, गार्डवाल निर्माण और पर्यावरणीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों की लगातार अनदेखी की गई।

सौरभ श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि परियोजना क्षेत्र में वन्यजीवों, विशेषकर धारीदार लकड़बग्घों की संख्या में भारी कमी आई है तथा कई मृत वन्यजीवों के मिलने की घटनाएं इस बात की ओर संकेत करती हैं कि पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी कर खनन कार्य संचालित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में राज्य के मुख्य सचिव, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, परियोजना संचालक एवं संबंधित कंपनियों को प्रदूषण रोकने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में न्यायालय के आदेश का गलत अर्थ निकालना न केवल जनता को भ्रमित करना है, बल्कि न्यायालय की अवमानना के समान भी है।

प्रेस वार्ता में सौरभ ने कहा कि 7 मई 2013 को जारी वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के कार्यालय आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि परियोजना से निकाले गए कोयले का परिवहन ट्रकों के माध्यम से रेलवे साइडिंग तक किया जाएगा। इसके बावजूद हाईवा परिचालन की बात करना निर्धारित शर्तों का उल्लंघन है।

उन्होंने कहा कि परियोजना की अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाने के बाद उन्हें एवं उनके परिवार को जान-माल का खतरा महसूस हो रहा है। इस संबंध में वह जल्द ही लातेहार पुलिस अधीक्षक से मिलकर सुरक्षा की मांग करेंगे।

सौरभ श्रीवास्तव ने कहा कि विस्थापितों, प्रभावित ग्रामीणों और स्थानीय युवाओं के अधिकारों की लड़ाई अंतिम समय तक जारी रहेगी, चाहे इसके लिए उन्हें कितनी भी यातनाएं और धमकियां क्यों न सहनी पड़ें।

इस प्रेस वार्ता में विस्थापित प्रभावित मंच की ओर से दिनेश यादव, बाली यादव, राहुल यादव, देवनारायण यादव, टेकलाल तुरी, रवि यादव, जितेंद्र यादव, सूरज ठाकुर, चंदन यादव और जेएमएम नेता सौरभ श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।

प्रेस वार्ता के बाद जिला मुख्यालय में यह चर्चा तेज हो गई है कि तेतरियाखांड कोल परियोजना विवाद आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है तथा मामले से जुड़े कई अन्य तथ्य भी सामने आ सकते हैं।

रिपोर्टर =बब्लू खान 

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.