बेंच घोटाला! 4,500 की बेंच खरीदी गई 18,800 में, पंचायतों में 79 लाख की गड़बड़ी का आरोप

लातेहार : लातेहार जिले की पंचायतों में जनसुविधा और सौंदर्यीकरण के नाम पर लगाए गए आरसीसी बेंच अब बड़े वित्तीय घोटाले की शक्ल लेते नजर आ रहे हैं। 15वें वित्त आयोग मद से वित्तीय वर्ष 2025-26 में पंचायतों में लगाए गए 551 आरसीसी बेंच की खरीद में भारी अनियमितता का मामला सामने आया है। मेरी पंचायत सरकार एप्लीकेशन से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार तीन प्रखंडों—सदर, महुआडांड़ और मनिका—में कुल 1 करोड़ 3 लाख 92 हजार 770 रुपए खर्च किए गए, जबकि बाजार दर के हिसाब से यही बेंच लगभग 25 लाख रुपए में खरीदे जा सकते थे।
आंकड़ों के मुताबिक एक आरसीसी बेंच पर औसतन 18,800 रुपए खर्च किए गए, जबकि बाजार में इसी तरह की बेंच की कीमत लगभग 4,500 रुपए बताई जा रही है। इस आधार पर देखा जाए तो खरीद प्रक्रिया में करीब 78.79 लाख रुपए की अतिरिक्त राशि खर्च की गई, जिसे लेकर पंचायत व्यवस्था और खरीद प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि लाखों रुपए खर्च करने के बावजूद कई पंचायतों में लगाए गए बेंच एक साल के भीतर ही टूटने और क्षतिग्रस्त होने लगे हैं। इससे न केवल गुणवत्ता बल्कि पूरे टेंडर और सप्लाई प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
 
सदर प्रखंड बना खर्च का सबसे बड़ा केंद्र
 
423 बेंच पर फूंक दिए गए करीब 80 लाख रुपए
 
लातेहार सदर प्रखंड की 15 पंचायतों में कुल 423 आरसीसी बेंच लगाए गए। इसके लिए 79 लाख 94 हजार रुपए खर्च किए गए। यानी प्रति बेंच औसतन करीब 18,900 रुपए भुगतान किया गया।
 
रिपोर्ट के अनुसार 14 पंचायतों में 407 बेंच लगाने के लिए 76.94 लाख रुपए खर्च किए गए, जबकि एक पंचायत में 16 बेंच के लिए अलग से भुगतान हुआ। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई पंचायतों में लगे बेंच अब टूटने लगे हैं और उनकी गुणवत्ता बेहद खराब है।
 
 
 
महुआडांड़ में भी खेल वही, दाम आसमान पर
 
91 बेंच के लिए 16.99 लाख रुपए खर्च
 
महुआडांड़ प्रखंड की सात पंचायतों में कुल 91 आरसीसी बेंच लगाए गए। इसके लिए 16 लाख 99 हजार रुपए खर्च किए गए। यहां भी प्रति बेंच लागत करीब 18,670 रुपए रही।
ग्रामीणों का कहना है कि जिन बेंचों को जनसुविधा के नाम पर लगाया गया था, उनमें कई की स्थिति कुछ ही महीनों में खराब हो गई। लोगों ने सवाल उठाया कि जब बाजार में कम कीमत पर बेहतर गुणवत्ता की सामग्री उपलब्ध है तो इतनी ऊंची दर पर खरीद क्यों की गई।
 
 
 
मनिका में 37 बेंच पर 7 लाख खर्च
 
प्रति बेंच लागत 18,888 रुपए पहुंची
 
मनिका प्रखंड में कुल 37 आरसीसी बेंच लगाए गए, जिनकी कुल लागत 6 लाख 98 हजार रुपए बताई गई। यहां प्रति बेंच लागत लगभग 18,888 रुपए रही।स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि पंचायत स्तर पर खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित एजेंसियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
 
वारंटी के बावजूद टूटे पड़े हैं दर्जनों बेंच
 
दो साल की गारंटी, फिर भी नहीं हुई मरम्मत
वेंडर के कोटेशन के अनुसार आरसीसी बेंच पर दो साल की वारंटी दी गई थी। बावजूद इसके कई पंचायतों में दो दर्जन से अधिक बेंच टूट चुके हैं।सबसे बड़ा सवाल यह है कि वारंटी अवधि के भीतर खराब सामग्री बदलने का प्रावधान होने के बावजूद अब तक टूटे बेंचों को बदला या मरम्मत नहीं किया गया। इससे सप्लाई एजेंसी और संबंधित अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी पैसे से खरीदी गई सामग्री की न तो गुणवत्ता जांच हुई और न ही समय-समय पर निरीक्षण किया गया।
 
 
बाजार रेट बनाम सरकारी भुगतान
 
विवरण बाजार दर सरकारी भुगतान
 
एक आरसीसी बेंच की अनुमानित कीमत ₹4,500 ₹18,800
कुल बेंच 551 551
कुल अनुमानित बाजार लागत ₹24.79 लाख ₹1.03 करोड़
संभावित अतिरिक्त खर्च ₹78.79 लाख
 
 
 
जांच के आदेश, डीडीसी ने कही बड़ी बात
 
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए डीडीसी मोहम्मद सैयद रियाज अहमद ने कहा कि लातेहार प्रखंड में मामले की जांच चल रही है। यदि अन्य प्रखंडों में भी इसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है तो व्यापक जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।उन्होंने संकेत दिए कि शिकायत और दस्तावेजों के आधार पर पूरे मामले की गंभीरता से जांच होगी।
 
 
अब उठ रहे बड़े सवाल
 
बाजार से चार गुना अधिक कीमत पर खरीद क्यों हुई?
 
सप्लायर का चयन किस आधार पर किया गया?
 
गुणवत्ता जांच किस अधिकारी ने की?
 
टूटे बेंच वारंटी में अब तक क्यों नहीं बदले गए?
 
क्या पंचायत स्तर पर वित्तीय नियमों का पालन हुआ?
 
 
लातेहार जिले में सामने आए इस कथित “बेंच घोटाले” ने पंचायत व्यवस्था और सरकारी खरीद प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।
 
रिपोर्टर : बब्लू खान

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