नक्सलवाद गया, विकास नहीं आया: कटिया गांव आज भी प्यासा, अंधेरे में और सड़क से कोसों दूर
लातेहार : एक समय था जब सरयू प्रखंड का कटिया गांव नक्सल गतिविधियों के कारण पूरे देश में चर्चा का विषय बना था। वर्ष 2013 में इसी इलाके में नक्सलियों ने सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ के दौरान तीन जवानों के शवों में विस्फोटक प्लांट कर दिया था। इस घटना ने राज्य ही नहीं बल्कि केंद्र सरकार को भी झकझोर दिया था। इसके बाद कटिया और आसपास का इलाका सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के विशेष फोकस में आ गया।
सुरक्षा बलों ने ग्रामीणों का विश्वास जीतने के लिए लगातार अभियान चलाए। कई वर्षों तक चले संयुक्त ऑपरेशन के बाद यह इलाका नक्सल प्रभाव से लगभग मुक्त हो गया। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब विकास की किरण उनके गांव तक पहुंचेगी, लेकिन समय बीतता गया और विकास के अधिकांश वादे केवल कागजों तक सीमित रह गए। आज स्थिति यह है कि आजादी के 75 वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कटिया गांव मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। गांव के लोग अब भी सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।
पानी के लिए नदी का सहारा
कटिया गांव के ग्रामीणों की सबसे बड़ी समस्या पेयजल की है। गांव में आज तक शुद्ध पेयजल की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी है। गर्मी के दिनों में हालात और भी बदतर हो जाते हैं।ग्रामीण बताते हैं कि उन्हें नदी के किनारे चुआं खोदकर पानी निकालना पड़ता है। यही पानी पीने, खाना बनाने और अन्य घरेलू कार्यों में उपयोग किया जाता है। बरसात के दिनों में नदी का पानी गंदा हो जाता है, जिससे जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।ग्रामीणों का कहना है कि कई बार अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन आज तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
सड़क नहीं, पगडंडी ही एक सहारा
कटिया गांव तक पहुंचने के लिए आज भी कोई समुचित सड़क नहीं है। गांव तक जाने के लिए लोगों को कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। बरसात के मौसम में यह रास्ता और भी कठिन हो जाता है।बीमार व्यक्ति, गर्भवती महिलाएं और बुजुर्ग सबसे अधिक परेशान होते हैं। कई बार मरीजों को खाट या अस्थायी स्ट्रेचर पर उठाकर मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है।ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण की मांग वर्षों से की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई।
डिजिटल इंडिया युग में बिजली के बिना गुजर रही जिंदगी
देश डिजिटल युग में प्रवेश कर चुका है, लेकिन कटिया गांव के कई परिवार आज भी बिजली की रोशनी से वंचित हैं। शाम ढलते ही गांव अंधेरे में डूब जाता है। मोबाइल चार्ज करने के लिए लोगों को दूसरे गांवों का सहारा लेना पड़ता है। बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है। ग्रामीणों का कहना है कि वे आज भी पाषाण युग जैसी परिस्थितियों में जीवन जीने को मजबूर हैं।
शिक्षा व्यवस्था भी बदहाल
कटिया गांव में कभी संचालित विद्यालय का समायोजन कर दिया गया। इसके बाद गांव के बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए दूसरे गांवों में जाना पड़ता है।दूर-दराज के रास्ते और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कई बच्चे नियमित रूप से स्कूल नहीं जा पाते। इसका सीधा असर उनकी शिक्षा पर पड़ रहा है।ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पुनः विद्यालय की व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
राशन लेने में भी खर्च हो जाते हैं सैकड़ों रुपये
सरकार गरीबों को मुफ्त राशन उपलब्ध करा रही है, लेकिन कटिया गांव के लोगों के लिए यह सुविधा भी आसान नहीं है।
ग्रामीणों के अनुसार राशन वितरण केंद्र दूर होने के कारण उन्हें आने-जाने में लगभग 500 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। ऐसे में मुफ्त राशन का लाभ भी उनके लिए महंगा साबित हो रहा है।
स्वास्थ्य सुविधाओं का घोर अभाव
कटिया गांव में स्वास्थ्य सुविधा लगभग नहीं के बराबर है। किसी भी प्रकार की आपात स्थिति में ग्रामीणों को लंबी दूरी तय कर अस्पताल पहुंचना पड़ता है।गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव या आसपास के क्षेत्र में स्वास्थ्य उपकेंद्र की स्थापना की जानी चाहिए।
जनप्रतिनिधियों से नाराज हैं ग्रामीण
ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय नेता गांव पहुंचते हैं और विकास के बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही गांव की सुध लेने कोई नहीं आता।ग्रामीणों का कहना है कि न तो पंचायत प्रतिनिधि, न विधायक और न ही सांसद गांव की समस्याओं को गंभीरता से लेते हैं। परिणामस्वरूप गांव आज भी विकास की मुख्यधारा से कटा हुआ है।
नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में सरकार का साथ दिया, उसे अब विकास का अधिकार मिलना चाहिए। : ग्रामीण
कटिया गांव के लोगों ने सरकार और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि गांव में जल्द से जल्द सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। ग्रामीणों का कहना है कि जिस गांव ने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में सरकार का साथ दिया, उसे अब विकास का अधिकार मिलना चाहिए।
कटिया गांव की प्रमुख समस्याएं
शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं
आज भी नदी में चुआं खोदकर पीते हैं पानी
* गांव तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं
* बिजली सुविधा पूरी तरह नदारद
*
स्वास्थ्य केंद्र और चिकित्सा सुविधाओं का अभाव
स्कूल समायोजन के बाद बच्चों को दूर जाना पड़ता है
राशन लेने के लिए 500 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं
जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से ग्रामीणों में नाराजगी
2013 की बड़ी नक्सली घटना के बाद सुर्खियों में आया था कटिया, 13 साल बाद भी मूलभूत सुविधाओं का इंतजार
कटिया का सवाल आज भी कायम है जब नक्सलवाद खत्म हो गया, तो विकास गांव तक कब पहुंचेगा?
रिपोर्टर : बब्लू खान
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