गारु बाजार मे एक डस्टबिन की कीमत 7500 रुपए पर सप्लाई 18090 रुपए मे हुई
लातेहार : गारू प्रखंड के कार्रवाई पंचायत मे 15वे वित्त आयोग की प्रमुख फंड की राशि सें डस्टबिन खरीद मे वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है. यहां सरकारी नियमों को दरकिनार कर वित्तीय वर्ष 2026-27 मे 11डस्टबिन की खरीदारी कर लाभुक समिति के माध्यम सें 1लाख 99 हजार रुपए का भुगतान कर दिया गया है. जानकारी के अनुसार कार्रवाई निवासी चंद्रकिशोर सिंह को लाभुक बनाकर उसके खाते मे 1.99 लाख की राशि हस्तातांरित की गई.जबकि व्यावसायिक सामग्री खरीद के लिए दुकानदारों सें कोटेशन मांगने और और निर्धारित प्रक्रिया अपनाने के बजाय लाभुक समिति के माध्यम सें भुगतान कर दिया गया. जितनी राशि सें 11 डस्टबिन खरीदे गये है उस हिसाब सें प्रति डस्टबिन की लागत लगभग रु 18090/- बैठती है. जबकि इस प्रकार के डस्टबिन की बाजार कीमत करीब 6000 सें 7500 प्रति यूनिट है.बाजार दर के अनुसार 11 डस्टबिन की कीमत 66 हजार सें 82500 के बीच होती है ऐसे मे भुगतान की गई राशि और बाजार कीमत के बीच करीब 1.16 लाख सें 1.33 लाख तक का अंतर दिखाई दे रहा है जिसमें खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठ गये है. चंद्रकिशोर सिंह नें बताया की उनके पास कोडरमा सें एक वेंडर आया था.जिसने डस्टबिन उपलब्ध कराया.उनके अनुसार उक्त डस्टबिन पंचायत क्षेत्र के विभिन्न विद्यालय मे लगाये गए.हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया की वेंडर का चयन किस प्रकिया के तहत किया गया और खरीद की दरे किस आधार पर तय हुई.
बीते साल डस्टबिन खरीद और इनस्टॉलेशन पर 5 लाख हुए थे खर्च
पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 मे भी ब्लॉक पंचायत यानि प्रमुख फंड सें गारू क्षेत्र मे डस्टबिन खरीद और इनस्टॉलेशन के नाम पर सरकारी राशि खर्च की गई थी. ई -ग्राम स्वराज पोर्टल के अनुसार सुग्गा बांध पर्यटन क्षेत्र मे डस्टबिन लगाने के लिए ओम प्रकाश कुमार को लाभुक समिति बनाकर 2,49,900 का भुगतान किया गया था.वहीं मिर्चईया फॉल मे डस्टबिन इनस्टॉलेशन के नाम पर विकास कुमार को लाभुक समिति के माध्यम सें 2,49,900 की राशि दी गई थी. इस तरह सें दोनों योजनाओं मे मे कुल 4,99,800 की राशि खर्च की गई।
लगाए गए ज्यादातर डस्टबिन गायब
वर्तमान स्थिति पर नजर डालने पर कई सवाल खड़े हो रहे है स्थानीय लोगों का कहना है की सुग्गाबांध और मिर्चईया फॉल क्षेत्र मे वर्तमान मे करीब 8-10डस्टबिन ही दिखाई दे रहे है.ऐसे मे अपेक्षित संख्या मे डस्टबिन नहीं दिखने सें योजना के क्रियान्वयन और सरकारी राशि के उपयोग पर सवाल उठने लगे है।
रिपोर्टर : बब्लू खान
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