विद्युत शक्ति उपकेंद्र का कोई रखवाला नहीं, अतिसंवेदनशील क्षेत्र में खुलेआम घूमती है पशुएं
लातेहार - बालूमाथ आम तौर पर विद्युत शक्ति उपकेंद्र को सुरक्षा और असुरक्षित संचालन की स्थिति में उत्पन्न होने वाले संभावित खतरे को ध्यान में रखते हुए अति संवेदनशील माना जाता है। जहां मामूली सी चूक भी बड़ी घटना का रूप ले सकती है। जिससे बड़े पैमाने पर जानमाल की क्षति के साथ साथ सरकारी संपत्ति का भी भारी नुकसान से इनकार नहीं किया जा सकता है। परन्तु बालूमाथ के तसतबार में झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड द्वारा संचालित 33/11 केवीए विद्युत शक्ति उपकेंद्र सुरक्षा नियमों के साथ खिलवाड़ का केंद्र बना हुआ है। अति संवेदनशील क्षेत्र जहां 33 हजार व 11 हजार वॉट के बिजली करंट प्रवाहित होते रहते हैं। वहां इंसान क्या पशुओं को भी बेपरवाह विचरण करते हुए आसानी से देखा जा सकता है। उसपर भी दुर्भाग्य यह है कि सोमवार को जब केंद्र की स्थिति जानने की कोशिश की गई तो पूरा विद्युत शक्ति उपकेंद्र में कोई दक्ष तकनीकी जानकार का होना तो दूर सिर्फ एक दैनिक वेतनभोगी के भरोसे विद्युत शक्ति उपकेंद्र का संचालन किया जा रहा था। वह भी तब जब बालूमाथ स्थित विद्युत शक्ति उपकेंद्र में आग लग जाने की घटना पूर्व में घटित हो चुकी है। यही नहीं विद्युत शक्ति उपकेंद्र में अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए फायर एक्सटिंगुशर समेत बचाव के अन्य उपकरणों के पर्याप्त उपलब्धता का घोर अभाव है। जिससे अप्रिय स्थिति में होने वाले संभावित नुकसान का दायरा वृहद होने से इंकार नहीं किया जा सकता है।
तकनीकी योग्यता के बगैर काम कर रहे हैं दैनिक वेतनभोगी
विद्युत शक्ति उपकेंद्र में अधिकांश आउटसोर्सिंग कंपनी के माध्यम से दैनिक वेतनभोगी कर्मी कार्यरत हैं। परन्तु उनमें ज़्यादातर कर्मी गैर तकनीकी योग्यता वाले हैं। जबकि टेक्निकल कार्य बिना किसी रोक टोक के धड़ल्ले से करते आ रहे हैं। सरकार के इस इकाई में ही यदि सरकार द्वारा सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए नियमों को ताक पर रख कर काम किया जा रहा हो तो गैर सरकारी संस्थानों से इस संदर्भ में उम्मीद रखना बेमानी है।
ड्यूटी के प्रति लापरवाही की भी लगातार मिलते रहती है शिकायतें
बालूमाथ स्थित विद्युत शक्ति उपकेंद्र में तीन एसबीओ ऑपरेटर के रूप में कार्यरत हैं, परन्तु सोमवार को ऑपरेटर की ड्यूटी होने के बावजूद विद्युत शक्ति उपकेंद्र में मौजूद नहीं था। जानकारी लेने पर बताया गया कि वह अपने निजी कार्यों को लेकर घर गए हुए हैं। महज एक दैनिक वेतनभोगी के भरोसे विद्युत शक्ति उपकेंद्र संचालित की जा रही है। अप्रिय स्थिति से निबटने में दैनिक वेतनभोगी कर्मी कितना सक्षम होगा इसका सहज अंदाजा ही लगाया जा सकता है।
क्या कहते हैं संबंधित विभाग के उच्चाधिकारी
इस संबंध में विभाग के सहायक अभियंता बिरसा उरांव से संपर्क स्थापित किया गया तो उन्होंने अधिकांश सवालों से अंभिज्ञता जताते हुए या तो गोलमोल जवाब दिए या फिर देखते हैं जानकारी नहीं है व जानकारी लेते हैं का जवाब दिया। ऐसे में यह प्रश्न उठना लाजिमी है कि आमजनों के लिए इतने महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले सरकारी सेवा से जुड़े विभाग की यह स्थिति है तो आमजनों को सरकार की सोच के मुताबिक सुविधा कैसे उपलब्ध हो पाएगी।
रिपोर्टर - मो० अरबाज
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