या अली-या हुसैन के नारों से गूंजा लातेहार,मोहर्रम नवमी पर निकला भव्य छोटकी चौकी जुलूस

लातेहार : मोहर्रम की नवमी के अवसर पर गुरुवार को छोटकी चौकी का पारंपरिक जुलूस अंसार नगर करकट और अमवाटीकर से निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में मुस्लिम धर्मावलंबी शामिल हुए और थाना चौक लातेहार पहुंचकर पारंपरिक खेल एवं हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया।

जुलूस के दौरान युवाओं ने लाठी-डंडों के साथ विभिन्न प्रकार के पारंपरिक खेल और युद्धक कला का प्रदर्शन कर लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। पूरे रास्ते "या अली" और "या हुसैन" के गगनभेदी नारों से माहौल गुंजायमान रहा। मोहर्रम जुलूस में शामिल लोग पारंपरिक वेशभूषा में लाठी, डंडे एवं अन्य पारंपरिक प्रतीकात्मक हथियारों के साथ चल रहे थे। कहा जाता है कि *
मोहर्रम की नवमी (9वें दिन) का जुलूस मुख्य रूप से हजरत इमाम हुसैन (रजि अल्लाह हु अनहो.) के छह महीने के मासूम बेटे हजरत अली असगर और उनके भाई हजरत अब्बास अलैह slam * की याद और शहादत के गम में निकाला जाता है।
मोहर्रम का पूरा महीना इस्लाम के इतिहास में बेहद गमगीन माना जाता है। 
सन् 61 हिजरी (लगभग 680 ईस्वी) में इराक के कर्बला के मैदान में यजीद की अत्याचारी सेना ने पैगंबर मोहम्मद के नवासे (पोते) हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों को घेर लिया था। 9वें मोहर्रम को इतिहास  इस दिन मुख्य रूप से दो बड़ी घटनाएं हुईं: इमाम हुसैन और उनके छोटे-छोटे बच्चों, परिवार के लिए 7वें मोहर्रम से ही पानी बंद कर दिया गया था, लेकिन 9वें दिन तक आते-आते भूख और प्यास से बच्चों का हाल बेहाल हो गया।
  इमाम हुसैन के 6 महीने के बेटे हजरत अली असगर प्यास से तड़प रहे थे। जब इमाम हुसैन उन्हें यजीद की फौज के सामने ले गए कि इस मासूम को थोड़ा पानी दे दो, तो पानी देने के बजाय यजीदी फौज के एक तीरंदाज (हरमला) ने उस 6 महीने के बच्चे के गले पर तीन भालों वाला तीर मार दिया, जिससे उस मासूम की इमाम हुसैन की गोद में ही शहादत हो गई।
  हजरत इमाम हुसैन के भाई हजरत अब्बास (जिन्हें 'गाजी' भी कहा जाता है), बच्चों की प्यास उनसे देखी नहीं गई। वे पानी लाने के लिए अलम (परचम/झंडा) लेकर फुरात नदी की तरफ गए। उन्होंने पानी का मश्कीजा (थैला) भरा, लेकिन लौटते वक्त यजीद की फौज ने उन पर हमला कर दिया और उनके दोनों हाथ काट दिए। वे पानी बच्चों तक नहीं पहुंचा सके और वहीं शहीद हो गए।

9 तारीख की शाम या रात को छोटे आकार की ताजिया उसी की याद में निकाली जाती है। इसे "छोटकी", चौकी "नौवीं का जुलूस" मौके पर 
अंसार नगर करकट से अयुब अंसारी, पूर्व सदर नसरुद्दीन अंसारी, वार्ड पार्षद आरिफ अंसारी, इस्लाम अंसारी, अब्दुल गफ्फार अंसारी सरफराज   मुखिया सहित कई गणमान्य लोग जुलूस में शामिल हुए। वहीं अमवाटीकर से रिजवान अंसारी, मजीद खान, शहीद खान, गुड्डू अंसारी, जावेद खान और शारिक खान समेत सैकड़ों लोगों की सहभागिता रही।

रिपोर्टर : बब्लू खान 

 

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