कृषि पर अलनीनों के प्रभाव को लेकर बालूमाथ कृषि विज्ञान केंद्र में जागरूकता कार्यक्रम
बालूमाथ : कृषि पर अलनीनों के संभावित प्रभावों से किसानों को जागरूक करने के उद्देश्य से बालूमाथ कृषि विज्ञान केंद्र में एक दिवसीय जागरूकता सह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि अल नीनो एक वैश्विक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से अधिक बढ़ जाने के कारण भारत में मानसून प्रभावित हो सकता है। इसके परिणामस्वरूप सामान्य से कम वर्षा होने की आशंका रहती है, जिससे खेती पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।कार्यक्रम का शुभारंभ ऑनलाइन माध्यम से हुआ। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस. सी. दुबे ने किसानों से कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए मध्यम एवं कम अवधि वाली धान की किस्मों के साथ-साथ दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती अपनाने की सलाह दी।
तकनीकी सत्र में प्रधान सह वरीय वैज्ञानिक डॉ. राजीव कुमार ने जल प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी। वैज्ञानिक (मृदा विज्ञान) डॉ. बिनोद कुमार ने कम पानी में होने वाली खरीफ फसलों एवं उपयुक्त किस्मों पर विस्तार से प्रकाश डाला। फसल सुरक्षा वैज्ञानिक गोपाल कृष्णा ने कीट एवं रोग प्रबंधन के वैज्ञानिक उपाय बताते हुए बदलते मौसम के कारण कीटों की बढ़ती प्रतिरोधक क्षमता पर चिंता जताई। कार्यक्रम में चार प्रखंडों के 10 गांवों से आए 52 प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। इस दौरान सिद्धार्थ, मुनी सिंह, अशोक कुमार, संजय कुमार, महावीर उरांव, मालती देवी, सुखदेव भोक्ता, बीरबल प्रजापति, राजेंद्र उरांव एवं शांति देवी सहित कई किसान उपस्थित रहे।
रिपोर्टर : मो० अरबाज
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