'लाल आतंक' रविंद्र गंझू कानून के शिकंजे में, पुलिस बोली– बचे नक्सली सरेंडर करें या कार्रवाई के लिए तैयार रहें
लातेहार - झारखंड में नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत लातेहार पुलिस को अब तक की बड़ी सफलताओं में से एक सफलता मिली है। झारखंड सरकार द्वारा 15 लाख रुपये तथा राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा 5 लाख रुपये के इनामी भाकपा (माओवादी) के रीजनल कमिटी सदस्य रविन्द्र गंझू उर्फ मुकेश गंझू उर्फ सुरेन्द्र गंझू को संयुक्त अभियान के दौरान गिरफ्तार कर लिया गया। उस पर कुल 20 लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस के अनुसार रविन्द्र गंझू लंबे समय से चंदवा,गुमला और लोहरदगा क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों का संचालन कर रहा था तथा संगठन के प्रमुख नेताओं में शामिल था। रात भर डटे रहे कोबरा के जवान अंधेरे जंगलों में सुबह घर से निकलते ही दौड़ा कर दबोचा जवानों ने गुप्त सूचना के बाद चला विशेष अभियान
पुलिस अधीक्षक कुमार गौरव ने प्रेस वार्ता में बताया कि लगातार सूचना मिल रही थी कि रविन्द्र गंझू अपने दस्ते के साथ बेतर ओपी क्षेत्र के हेसला बांझी टोला, रंगुनिया और कुडु इलाके में सक्रिय है। सूचना की पुष्टि होने के बाद 12 जुलाई 2026 को लातेहार पुलिस, सीआरपीएफ और कोबरा-209 बटालियन की संयुक्त विशेष टीम गठित की गई। जंगलों में कई घंटों तक चले सर्च अभियान के दौरान बांझी टोला के समीप से उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद
अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने एक AK-56 रायफल, दो मैगजीन, 180 जिंदा कारतूस, एक 7.65 एमएम ऑटोमैटिक पिस्टल, दो मैगजीन, 12 कारतूस, एक सिंगल बैरल देशी रायफल, 5.56 एमएम के 21 कारतूस, .303 बोर के 16 कारतूस तथा अन्य नक्सली सामग्री बरामद की। पुलिस का कहना है कि बरामद हथियारों का उपयोग कई बड़ी वारदातों में किया गया हो सकता है, जिसकी जांच की जा रही है।
30 वर्षों से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय
एसपी कुमार गौरव ने बताया कि 43 वर्षीय रविन्द्र गंझू करीब 30 वर्षों से माओवादी संगठन से जुड़ा था। वह संगठन के रीजनल कमिटी सदस्य के रूप में चंदवा, गुमला और लोहरदगा इलाके में नक्सली गतिविधियों का संचालन करता था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ 154 आपराधिक मामले दर्ज हैं। उस पर लेवी वसूली, सड़क और विकास योजनाओं में बाधा, सुरक्षा बलों पर हमले तथा कई हिंसक घटनाओं का आरोप है।
18 पुलिसकर्मियों की हत्या का आरोपी
पुलिस के अनुसार रविन्द्र गंझू पर 18 पुलिसकर्मियों की हत्या का भी आरोप है। वर्ष 2019-20 के दौरान उसका आतंक चरम पर था। उसने कई नक्सली घटनाओं की साजिश रची और सुरक्षा बलों पर हमलों को अंजाम दिया। रविंद्र गंझू, जो भाकपा माओवादी संगठन का रीजनल कमेटी सदस्य है, पर 19 जवानों और 18 ग्रामीणों की हत्या तथा 31 जवानों व 13 ग्रामीणों को घायल करने का आरोप है। उसके खिलाफ कई जिलों के थानों में गंभीर मामले दर्ज हैं।
चार जवानों की शहादत वाले हमले से भी जुड़ा नाम
रविन्द्र गंझू का नाम 22 नवंबर 2019 को चंदवा क्षेत्र में झारखंड पुलिस की पीसीआर वैन पर हुए नक्सली हमले में भी सामने आया था। इस हमले में चार पुलिसकर्मी शहीद हुए थे। जांच एजेंसियों के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के झारखंड दौरे के दिन इस हमले की साजिश रची गई थी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पत्नी की गिरफ्तारी से नाराज होकर उसने रेकी कराने वालों को पैसे देकर इस हमले की योजना बनाई थी। इस मामले की जांच भी एनआईए कर रही है।
एनआईए भी कर रही थी तलाश
रविन्द्र गंझू की तलाश केवल झारखंड पुलिस ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) भी कर रही थी। उसका नाम एक करोड़ के इनामी माओवादी नेता सुधाकरण से जुड़े मामले में भी सामने आया था। गुमला निवासी प्रभु साव की निशानदेही पर गारू थाना क्षेत्र से हथियार और नक्सली साहित्य की बरामदगी के मामले में भी उसकी भूमिका की जांच चल रही थी। इसके अलावा ऑपरेशन डबल बुल से जुड़े मामले में भी एनआईए उसकी तलाश कर रही थी।
पूछताछ में उगले कई राज
गिरफ्तारी के बाद रविन्द्र गंझू से पूछताछ की जा रही है। पुलिस का दावा है कि उसने संगठन की गतिविधियों, हथियारों के ठिकानों, सहयोगियों और नेटवर्क से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं। इन सूचनाओं के आधार पर पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां आगे की कार्रवाई में जुट गई हैं।
एसपी की चेतावनी
पुलिस अधीक्षक कुमार गौरव ने कहा कि जिले में सक्रिय बचे हुए नक्सलियों के पास अब एक ही रास्ता है कि वे आत्मसमर्पण करें और मुख्यधारा में लौट आएं। अन्यथा पुलिस का अभियान लगातार जारी रहेगा और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
सीआरपीएफ डीआईजी का सख्त संदेश
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद सीआरपीएफ डीआईजी पंकज कुमार ने कहा कि अब क्षेत्र में गिने-चुने नक्सली ही बचे हैं। सुरक्षा बल लगातार उनके खिलाफ अभियान चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलियों के पास दो ही विकल्प हैं—आत्मसमर्पण करें या कार्रवाई का सामना करें।
संयुक्त अभियान में शामिल रहे अधिकारी
इस सफल अभियान में कोबरा-209 बटालियन के उप कमांडेंट दीपक कुमार, बेतर ओपी प्रभारी रितेश कुमार राव, पुलिस अवर निरीक्षक रितेश तिग्गा, एसएटी-45 के प्रभारी मजलु कालिंदी सहित कोबरा-209 बटालियन, सीआरपीएफ, एसएटी-45 और लातेहार पुलिस के अधिकारी एवं जवान शामिल रहे।
नक्सल उन्मूलन अभियान को मिली बड़ी बढ़त
रविन्द्र गंझू की गिरफ्तारी को झारखंड में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी सफलता माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि उसकी गिरफ्तारी से न केवल माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है, बल्कि लातेहार, गुमला और लोहरदगा क्षेत्र में सक्रिय नक्सली नेटवर्क भी कमजोर होगा। पुलिस का कहना है कि अभियान आगे भी जारी रहेगा और क्षेत्र में शांति, सुरक्षा तथा विकास सुनिश्चित करने के लिए हर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
रिपोर्टर - बब्लू खान
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