शिक्षकों की शहरी प्रतिनियुक्ति पर उठे सवाल, सौरभ ने कहा—ग्रामीण बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं।

लातेहार - ग्रामीण एवं सुदूरवर्ती क्षेत्रों में पदस्थापित शिक्षकों के शहरी क्षेत्रों के विद्यालयों में स्थानांतरण एवं प्रतिनियुक्ति का मामला अब तूल पकड़ता दिखाई दे रहा है। इस मामले को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता सौरभ श्रीवास्तव ने स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के शिक्षा सचिव को पत्र लिखकर ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों में किए जा रहे स्थानांतरण एवं प्रतिनियुक्ति पर तत्काल रोक लगाने तथा पूर्व में किए गए ऐसे मामलों की जांच कराने की मांग की है।

सौरभ श्रीवास्तव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पिछले कुछ दिनों से उनके संज्ञान में लातेहार के ग्रामीण एवं सुदूरवर्ती क्षेत्रों में पदस्थापित कई सरकारी शिक्षकों के स्वास्थ्य एवं पारिवारिक कारणों सहित विभिन्न आधारों पर शहरी विद्यालयों में स्थानांतरण अथवा प्रतिनियुक्ति कराए जाने की जानकारी सामने आई है।उनका कहना है कि यदि बड़ी संख्या में शिक्षक ग्रामीण विद्यालयों से हटकर शहरी क्षेत्रों में चले जाते हैं, तो इसका सीधा असर ग्रामीण बच्चों की शिक्षा पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि सरकारी सेवा में पदस्थापन विभागीय आवश्यकता के अनुसार होता है और जिस स्थान पर कर्मचारी की पदस्थापना की जाती है, वहां पूरी निष्ठा एवं जिम्मेदारी के साथ सेवा देना उसका कर्तव्य है। 

निजी सुविधा के लिए यदि शिक्षक लगातार ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों की ओर स्थानांतरण या प्रतिनियुक्ति लेने लगेंगे, तो सुदूरवर्ती इलाकों के विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा व्यवस्था कौन संभालेगा। सौरभ ने कहा कि लातेहार अनुसूचित एवं आदिवासी बहुल जिला है, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चे सरकारी विद्यालयों पर निर्भर हैं।इन बच्चों के पास शहरी क्षेत्रों के बच्चों की तरह शिक्षा के वैकल्पिक संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में ग्रामीण विद्यालयों में शिक्षकों की कमी होना केवल प्रशासनिक समस्या नहीं बल्कि बच्चों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है।

स्थानांतरण के आधारों की हो गहन जांच

सौरभ श्रीवास्तव ने मांग की है कि हाल के दिनों में ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी विद्यालयों में स्थानांतरित अथवा प्रतिनियुक्त किए गए शिक्षकों के मामलों की समीक्षा की जाए। विशेष रूप से जिन शिक्षकों ने स्वास्थ्य, पारिवारिक अथवा अन्य विशेष परिस्थितियों का हवाला देकर शहरी क्षेत्र में पदस्थापन अथवा प्रतिनियुक्ति प्राप्त की है, उनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और कारणों की नियमानुसार जांच होनी चाहिए।

उन्होंने शिक्षा सचिव से मांग की है कि ग्रामीण एवं सुदूरवर्ती विद्यालयों में शिक्षकों की वास्तविक स्थिति का आकलन कराया जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी विद्यालय से शिक्षक को हटाने के कारण वहां पठन-पाठन प्रभावित न हो। सौरभ श्रीवास्तव के इस पत्र के बाद शिक्षा विभाग द्वारा इस मामले में क्या कदम उठाया जाता है, इस पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं। खासकर हाल के दिनों में ग्रामीण विद्यालयों से शहरी क्षेत्रों में स्थानांतरण अथवा प्रतिनियुक्ति पाने वाले शिक्षकों के मामलों की विभागीय समीक्षा होती है या नहीं, यह आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण होगा।

रिपोर्टर - बब्लू खान 

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