काले प्लास्टिक के डिब्बे: सुविधा या सेहत के लिए खतरा?
BY UJJWAL SINGH
आजकल ढाबों, होटलों और फूड डिलीवरी में काले प्लास्टिक के डिब्बों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. लेकिन क्या ये सुरक्षित हैं? हाल ही में राज्यसभा में इस मुद्दे पर चिंता जताई गई, जिसके बाद एक्सपर्ट्स ने भी इसके संभावित खतरों को लेकर चेतावनी दी है.
कैसे बनते हैं काले प्लास्टिक कंटेनर?
रिपोर्ट्स के अनुसार, काले प्लास्टिक के बर्तनों को अक्सर इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट और इंडस्ट्रियल प्लास्टिक से तैयार किया जाता है. इनमें डेकाबीडीई जैसे फ्लेम रिटार्डेंट केमिकल मिलाए जाते हैं, जो आग से बचाने में मदद करते हैं. समस्या यह है कि ये केमिकल पूरी तरह प्लास्टिक में बंधे नहीं रहते और गर्म होने पर खाने में घुल सकते हैं.खासकर जब खाना गरम या तैलीय हो, तो यह जोखिम और बढ़ जाता है.
सेहत पर क्या असर पड़ सकता है?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन कंटेनरों में BPA और फ्थेलेट्स जैसे हानिकारक तत्व पाए जाते हैं, जो हार्मोनल असंतुलन पैदा कर सकते हैं. Dr Aravind Badiger के अनुसार, लंबे समय तक ऐसे केमिकल्स के संपर्क में रहने से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है.वहीं Dr Sachin Trivedi बताते हैं कि ये तत्व दिल की बीमारी, डायबिटीज और प्रजनन समस्याओं का जोखिम भी बढ़ाते हैं.इसके अलावा Prof Chintamani के अनुसार, माइक्रोप्लास्टिक शरीर में जमा होकर टॉक्सिक लोड बढ़ाते हैं, जिससे कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं.
किन लोगों को ज्यादा खतरा?
बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों पर इसका असर ज्यादा गंभीर हो सकता है. हालांकि अभी तक इसका सीधा संबंध कैंसर से पूरी तरह साबित नहीं हुआ है, लेकिन इसके केमिकल्स को देखते हुए सावधानी जरूरी मानी जा रही है.
क्या है सुरक्षित विकल्प?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि काले प्लास्टिक की जगह ग्लास, स्टील या लकड़ी के बर्तनों का उपयोग करें. खासकर गर्म खाना रखने या गरम करने के लिए प्लास्टिक से बचना सबसे सुरक्षित तरीका है.
सुविधा के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ये काले प्लास्टिक डिब्बे धीरे-धीरे सेहत के लिए खतरा बन सकते हैं. इसलिए समय रहते जागरूक होना और सही विकल्प चुनना बेहद जरूरी है.

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