जानिए क्यों पैरों में अचानक जमा हो जाते हैं खून के थक्के
पैरों में अचानक दर्द, सूजन या भारीपन महसूस होना अक्सर साधारण समस्या लग सकती है, लेकिन इसके पीछे खून के थक्के बनने जैसी गंभीर वजह भी हो सकती है. मेडिकल भाषा में इसे वेनेस थ्रॉम्बोसिस कहा जाता है, जिसमें खून गाढ़ा होकर नसों में जम जाता है और ब्लॉकेज पैदा कर देता है. अगर यही थक्का टूटकर फेफड़ों तक पहुंच जाए, तो यह पल्मोनरी एम्बोलिज्म जैसी जानलेवा स्थिति का कारण बन सकता है.
जीन और लाइफस्टाइल: खतरे के मुख्य कारण
हाल ही में लुंड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की रिसर्च में यह सामने आया कि सिर्फ लाइफस्टाइल ही नहीं, बल्कि कुछ खास जीन भी खून के थक्के बनने के खतरे को बढ़ा सकते हैं. "माल्मो डाइट एंड कैंसर स्टडी" के तहत लगभग 30 हजार लोगों का डेटा एनालाइज किया गया। इसमें 27 ऐसे जीन की पहचान की गई, जो ब्लड क्लॉटिंग से जुड़े हैं. तीन प्रमुख जीन ABO, F8 और VWF खून के थक्के बनने के जोखिम को बढ़ाने में अहम पाए गए.
रिसर्च में बताया गया कि हर जीन अकेले 10 से 30 प्रतिशत तक जोखिम बढ़ा सकता है. अगर किसी व्यक्ति में कई जोखिम कारक मौजूद हों, तो खतरा और भी बढ़ जाता है. जिन लोगों में पांच तक ऐसे जेनेटिक फैक्टर पाए गए, उनमें ब्लड क्लॉट बनने का जोखिम 180 प्रतिशत तक अधिक देखा गया. इसके अलावा, "फैक्टर V लीडेन" नामक जीन म्यूटेशन भी खून के थक्के बनने की प्रवृत्ति बढ़ाता है.
जीवनशैली और खानपान का प्रभाव
केवल जीन ही नहीं, लाइफस्टाइल भी इस समस्या में अहम भूमिका निभाती है. लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना, जैसे लंबी फ्लाइट या सर्जरी के बाद बेड रेस्ट, ब्लड फ्लो धीमा कर देता है और थक्के बनने का खतरा बढ़ाता है. मोटापा, उम्र बढ़ना और लंबाई भी जोखिम बढ़ाने वाले कारक हैं. खानपान में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का ज्यादा सेवन खतरे को बढ़ा सकता है, जबकि फल, सब्जियां और ओमेगा-3 फैटी एसिड युक्त डाइट जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है.
इलाज और भविष्य की दिशा
एक्सपर्ट्स का मानना है कि भविष्य में जेनेटिक जानकारी के आधार पर इलाज को और बेहतर बनाया जा सकता है. इससे यह तय किया जा सकेगा कि किस मरीज को कितने समय तक ब्लड थिनर दवाओं की जरूरत है, जिससे खून के थक्कों के गंभीर जोखिम को कम किया जा सके.
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