IVF Treatment: किस उम्र तक महिलाएं करा सकती हैं आईवीएफ, जानिए सफलता दर और खर्च
आज के दौर में In Vitro Fertilization (IVF) उन दंपतियों के लिए उम्मीद की किरण बन गया है, जिन्हें प्राकृतिक रूप से गर्भधारण में कठिनाई होती है. यह एक उन्नत चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसमें लैब में एग और स्पर्म को फर्टिलाइज कर एम्ब्रियो तैयार किया जाता है और फिर उसे महिला के गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है. लेकिन अक्सर लोगों के मन में सवाल होता है कि आईवीएफ के लिए सही उम्र क्या है और इसमें कितना खर्च आता है.
भारत में आईवीएफ के लिए उम्र की सीमा
भारत में आईवीएफ को लेकर स्पष्ट नियम बनाए गए हैं. Assisted Reproductive Technology (Regulation) Act, 2021 के अनुसार, महिलाएं 21 से 50 वर्ष की उम्र तक आईवीएफ करा सकती हैं, जबकि पुरुषों के लिए यह सीमा 21 से 55 वर्ष तक तय की गई है. यह नियम महिला और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए बनाए गए हैं.
किस उम्र में सबसे ज्यादा सफल होता है IVF?
आईवीएफ की सफलता उम्र के साथ बदलती रहती है. 35 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में इसकी सफलता दर सबसे अधिक होती है, जो लगभग 50 से 60 प्रतिशत तक हो सकती है. वहीं 35 से 40 वर्ष के बीच यह घटकर 25 से 40 प्रतिशत रह जाती है. 40 साल के बाद भी आईवीएफ संभव है, लेकिन इसकी सफलता की संभावना काफी कम हो जाती है.
विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं में एग्स की गुणवत्ता और संख्या कम हो जाती है, जिससे एम्ब्रियो बनने की संभावना प्रभावित होती है. वहीं पुरुषों में भी उम्र के साथ स्पर्म क्वालिटी पर असर पड़ता है.
क्या मेनोपॉज के बाद भी संभव है प्रेग्नेंसी?
Menopause के बाद भी कुछ परिस्थितियों में आईवीएफ संभव हो सकता है.अगर महिला के पास पहले से फ्रीज किए गए एग्स हैं या डोनर एग्स का उपयोग किया जाए, तो गर्भधारण संभव है. हालांकि, इसके लिए महिला की शारीरिक स्थिति का स्वस्थ होना बेहद जरूरी है.
आईवीएफ का खर्च कितना आता है?
भारत में आईवीएफ का खर्च कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे क्लिनिक, शहर, डॉक्टर का अनुभव और तकनीक. आमतौर पर एक आईवीएफ साइकिल का खर्च 1 लाख रुपये से 3 लाख रुपये तक होता है. अगर डोनर एग, एम्ब्रियो फ्रीजिंग या एडवांस तकनीक का इस्तेमाल किया जाए, तो यह खर्च और बढ़ सकता है.
आईवीएफ एक जटिल लेकिन प्रभावी चिकित्सा प्रक्रिया है, जो सही समय और सही सलाह के साथ सफल हो सकती है. इसलिए इस प्रक्रिया को अपनाने से पहले विशेषज्ञ से सलाह लेना और सभी पहलुओं को समझना बेहद जरूरी है.


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