तंबाकू का हड्डियों और रीढ़ पर असर: जानें डराने वाला सच

तंबाकू और स्मोकिंग को आमतौर पर फेफड़ों की बीमारियों, हार्ट प्रॉब्लम और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जोड़ा जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका असर सिर्फ फेफड़े और दिल तक सीमित नहीं है? लंबे समय तक तंबाकू का सेवन आपकी हड्डियों और रीढ़ की हड्डियों (स्पाइन) को भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है.ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों के अनुसार, तंबाकू हड्डियों को कमजोर कर देता है और शरीर की हीलिंग प्रक्रिया को प्रभावित करता है.

तंबाकू और हड्डियों की कमजोरी

Health News Smoking also damages the brain know how it causes harm | Health  News: दिमाग को भी डैमेज करती है धूम्रपान, जानें कैसे पहुंचाती है नुकसान? |  Hindi News, Bihar Health

हड्डियां लगातार खुद को रिपेयर करती रहती हैं, लेकिन तंबाकू में मौजूद निकोटिन और अन्य हानिकारक तत्व इस प्रक्रिया को धीमा कर देते हैं. स्मोकिंग की वजह से हड्डियों तक रक्त का प्रवाह कम हो जाता है, जिससे उन्हें पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिल पाते. इसके परिणामस्वरूप फ्रैक्चर ठीक होने में ज्यादा समय लगता है और कई मामलों में हड्डियां पूरी तरह जुड़ नहीं पाती, जिसे नॉन यूनियन कहा जाता है.

रीढ़ की हड्डियों और डिस्क पर असर

युवाओं में बढ़ती धूम्रपान की आदत से हर साल हो रही लाखों भारतीयों की मौत –  India Times Group

तंबाकू का प्रभाव सिर्फ हड्डियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह रीढ़ (स्पाइन) को भी नुकसान पहुंचाता है. रीढ़ की हड्डियों के बीच मौजूद डिस्क शरीर में कुशन की तरह काम करती हैं. स्मोकिंग करने वालों में यह डिस्क जल्दी खराब होने लगती हैं क्योंकि उन्हें पर्याप्त पोषण और हाइड्रेशन नहीं मिल पाता. इसके कारण कम उम्र में पीठ दर्द, डिस्क प्रोलैप्स और नसों पर दबाव जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं.

ऑस्टियोपोरोसिस और हड्डियों की कमजोरियाँ

लंबे समय तक तंबाकू का सेवन ऑस्टियोपोरोसिस जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ा सकता है. इसमें हड्डियां कमजोर और भुरभुरी हो जाती हैं. तंबाकू शरीर में कैल्शियम के अवशोषण को प्रभावित करता है और बोन डेंसिटी कम कर देता है.पोस्ट मेनोपॉज महिलाओं में इसका खतरा ज्यादा होता है, लेकिन पुरुष भी इससे प्रभावित हो सकते हैं. ऑस्टियोपोरोसिस की वजह से मामूली चोट भी कूल्हे, रीढ़ और कलाई की हड्डियों में फ्रैक्चर का कारण बन सकती है.

स्मोकिंग बनाम चबाने वाला तंबाकू

कई लोग मानते हैं कि गुटखा या चबाने वाला तंबाकू स्मोकिंग से कम नुकसान पहुंचाता है. लेकिन डॉक्टर कहते हैं कि निकोटिन शरीर पर असर डालता है, चाहे वह धूम्रपान के जरिए जाए या चबाने वाले तंबाकू के जरिए.

रोकथाम और सुधार

तंबाकू छोड़ने के बाद शरीर धीरे-धीरे रिकवरी शुरू करता है. फ्रैक्चर या ऑर्थोपेडिक सर्जरी से पहले तंबाकू छोड़ने वाले लोगों में रिकवरी बेहतर और तेजी से होती है.

 एक्सपर्ट्स की सलाह है:

  • लगातार पीठ दर्द या बार-बार फ्रैक्चर को नजरअंदाज न करें.
  • स्मोकिंग और तंबाकू का सेवन कम या छोड़ें.
  • कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर डाइट लें.
  • नियमित एक्सरसाइज और फिजिकल एक्टिविटी बनाए रखें.
  • हड्डियों या स्पाइन से जुड़ी कोई समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह लें.

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.