महिलाएं सावधान! देर रात तक जागना पीरियड्स और प्रेग्नेंसी दोनों के लिए हो सकता है नुकसानदायक

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में महिलाएं घर, नौकरी और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच अपनी नींद से सबसे ज्यादा समझौता करती हैं. देर रात तक मोबाइल चलाना, ऑफिस का काम निपटाना या घरेलू जिम्मेदारियां निभाना अब आम बात हो गई है. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अधूरी या देर से ली गई नींद सिर्फ थकान ही नहीं बढ़ाती, बल्कि महिलाओं के हार्मोनल संतुलन, पीरियड्स और मां बनने की क्षमता पर भी गंभीर असर डाल सकती है.

नींद और हार्मोन्स का है गहरा संबंध

विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं की नींद और हार्मोन्स का आपस में सीधा संबंध होता है। शरीर एक जैविक घड़ी की तरह काम करता है और नींद इस घड़ी को सही तरीके से चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. केवल पर्याप्त घंटे सोना ही जरूरी नहीं है, बल्कि सही समय पर सोना भी उतना ही महत्वपूर्ण है.

दिमाग का वही हिस्सा जो नींद और जागने से जुड़े हार्मोन्स को नियंत्रित करता है, महिलाओं में ओवुलेशन (अंडोत्सर्जन) की प्रक्रिया को भी प्रभावित करता है. ओवुलेशन को शुरू करने वाला हार्मोन एलएच (LH) गहरी नींद के दौरान बनता है. यदि नींद बार-बार बाधित होती है या पर्याप्त नहीं मिलती, तो एलएच का उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे पीरियड्स अनियमित होने या ओवुलेशन छूटने की संभावना बढ़ जाती है.

कम नींद से फर्टिलिटी पर पड़ सकता है असर

डॉक्टरों का कहना है कि नींद की कमी से महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन, मेलाटोनिन, कोर्टिसोल, एलएच (LH) और एफएसएच (FSH) जैसे महत्वपूर्ण हार्मोन्स का संतुलन बिगड़ सकता है. इनमें मेलाटोनिन अंडों की गुणवत्ता बनाए रखने और उन्हें सुरक्षित रखने में मदद करता है। पर्याप्त नींद न मिलने पर इसका उत्पादन कम हो सकता है.

वहीं, कम नींद लेने से शरीर में तनाव बढ़ाने वाला हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है. इससे दिमाग और ओवरी के बीच समन्वय प्रभावित होता है, जिसके कारण एलएच और एफएसएच हार्मोन्स का प्रवाह बाधित हो सकता है. ये दोनों हार्मोन अंडों के विकास और सही समय पर उनके रिलीज होने के लिए आवश्यक होते हैं. ऐसे में भविष्य में गर्भधारण करने में दिक्कतें आ सकती हैं.

महिलाओं को कितनी नींद लेनी चाहिए?

विशेषज्ञों के मुताबिक, महिलाओं के लिए प्रतिदिन 7 से 8 घंटे की नींद सबसे उपयुक्त मानी जाती है. American Society of Reproductive Medicine के एक अध्ययन में पाया गया कि जो महिलाएं 7 से 8 घंटे की नींद लेती हैं, उनमें गर्भधारण की संभावना उन महिलाओं की तुलना में अधिक होती है जो 7 घंटे से कम या 9 घंटे से ज्यादा सोती हैं. इसलिए डॉक्टर महिलाओं को सलाह देते हैं कि वे रात 11 बजे तक सोने की आदत बनाएं, ताकि उनकी प्रजनन क्षमता और संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर बना रहे.

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