Delhi Health Report 2025: दिल्ली में नवजात मौतें घटीं, लेकिन मातृ मृत्यु दर बढ़ी; सरकारी रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

दिल्ली सरकार द्वारा जारी "दिल्ली स्टेट इंडिकेटर फ्रेमवर्क: स्टेटस रिपोर्ट 2025" में राजधानी के स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, गरीबी और पर्यावरण से जुड़े कई महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals - SDGs) के तहत वर्ष 2030 तक दिल्ली की प्रगति का आकलन करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इसका मकसद नीति निर्माताओं को यह समझने में मदद करना है कि किन क्षेत्रों में सुधार हुआ है और किन क्षेत्रों में अभी और काम करने की आवश्यकता है। रिपोर्ट में जहां नवजात मृत्यु दर में कमी दर्ज की गई है, वहीं मातृ मृत्यु दर में बढ़ोतरी चिंता का विषय बनकर सामने आई है।

नवजात मृत्यु दर में सुधार, मातृ मृत्यु दर ने बढ़ाई चिंता

रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में नवजात मृत्यु दर (Neonatal Mortality Rate) में पिछले कुछ वर्षों के दौरान सुधार हुआ है। वर्ष 2015 में प्रति 1000 जीवित जन्मों पर नवजात मृत्यु दर 15.8 थी, जो वर्ष 2024 में घटकर 14.1 रह गई है। यह स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का संकेत माना जा रहा है।

हालांकि, मातृ मृत्यु दर (Maternal Mortality Ratio) के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। वर्ष 2015 में प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 37 महिलाओं की मृत्यु होती थी, जबकि वर्ष 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 44 हो गया है। खास बात यह है कि यह बढ़ोतरी ऐसे समय में दर्ज की गई है, जब स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की निगरानी में प्रसव कराने वाली महिलाओं की संख्या 2015 के 84.4 प्रतिशत से बढ़कर 2024 में 96.1 प्रतिशत हो चुकी है।

शिक्षा, रोजगार और पोषण के क्षेत्र में सुधार

रिपोर्ट में स्वास्थ्य के अलावा शिक्षा और सामाजिक विकास के क्षेत्र में भी सकारात्मक बदलाव दर्ज किए गए हैं। दिल्ली के लगभग सभी सरकारी स्कूलों में बिजली और डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध हो चुकी हैं। वहीं उच्च शिक्षा में दाखिला लेने वाले छात्रों की संख्या में भी वृद्धि हुई है, जो शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रगति का संकेत है।

बच्चों के पोषण को लेकर रिपोर्ट में मिले-जुले परिणाम सामने आए हैं। लंबे समय से चली आ रही कुपोषण की समस्या में कुछ कमी आई है, लेकिन कम वजन वाले बच्चों की संख्या में अभी तक कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं देखा गया है। इससे स्पष्ट है कि बाल पोषण के क्षेत्र में अभी और प्रभावी प्रयासों की आवश्यकता है।

पर्यावरण और इलेक्ट्रिक वाहनों में उल्लेखनीय प्रगति

पर्यावरण के मोर्चे पर भी दिल्ली ने कुछ सकारात्मक उपलब्धियां हासिल की हैं। रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी में कचरा प्रबंधन पहले की तुलना में बेहतर हुआ है और अब अधिक मात्रा में कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटारा किया जा रहा है।

इसके अलावा, वायु प्रदूषण के स्तर में दस वर्ष पहले की तुलना में कुछ कमी दर्ज की गई है, हालांकि प्रदूषण अभी भी निर्धारित मानकों से काफी अधिक बना हुआ है। वहीं इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर भी दिल्ली ने तेज़ी से प्रगति की है। वर्ष 2015-16 में जहां इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या केवल 24,420 थी, वहीं 2024-25 तक यह बढ़कर 4 लाख से अधिक हो गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली ने शिक्षा, पर्यावरण, कचरा प्रबंधन और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। नवजात मृत्यु दर में आई कमी भी एक सकारात्मक संकेत है। लेकिन मातृ मृत्यु दर में हुई बढ़ोतरी यह स्पष्ट करती है कि गर्भवती महिलाओं और माताओं के स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाने की जरूरत है। सरकार का मानना है कि इस रिपोर्ट के आधार पर भविष्य की नीतियां तैयार कर स्वास्थ्य और सामाजिक विकास के क्षेत्रों में बेहतर सुधार सुनिश्चित किया जा सकेगा।

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