क्या बच्चों में ज्यादा मोबाइल चलाने से कब्ज हो सकती है? जानिए क्या कहती है मेडिकल साइंस
आजकल छोटे बच्चे भी घंटों मोबाइल, टैबलेट और टीवी स्क्रीन के सामने समय बिताने लगे हैं। ऐसे में कई माता-पिता यह सवाल पूछते हैं कि क्या ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों में कब्ज की समस्या बढ़ा सकता है? विशेषज्ञों के अनुसार, मोबाइल सीधे तौर पर कब्ज का कारण नहीं बनता, लेकिन इससे जुड़ी कुछ आदतें कब्ज का खतरा बढ़ा सकती हैं।

कैसे बढ़ सकता है कब्ज का जोखिम?
जब बच्चा लंबे समय तक मोबाइल या टीवी में व्यस्त रहता है, तो उसकी शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है। शरीर की हलचल कम होने से पाचन तंत्र की कार्यक्षमता भी प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, कई बच्चे गेम या वीडियो देखने में इतने मशगूल हो जाते हैं कि उन्हें टॉयलेट जाने की इच्छा होने पर भी वे उसे टाल देते हैं। बार-बार ऐसा होने से मल सख्त हो सकता है और कब्ज की समस्या पैदा हो सकती है।
खान-पान भी निभाता है बड़ी भूमिका-
अधिक स्क्रीन टाइम का असर बच्चों की खाने-पीने की आदतों पर भी पड़ सकता है। मोबाइल देखते हुए बच्चे अक्सर जंक फूड ज्यादा खाते हैं और पानी कम पीते हैं। वहीं फल, हरी सब्जियां और फाइबर से भरपूर आहार कम लेने से कब्ज की संभावना बढ़ जाती है।

कब्ज से बचाने के आसान उपाय-
बच्चे को रोज कम से कम 60 मिनट शारीरिक गतिविधि या आउटडोर खेल के लिए प्रोत्साहित करें।
दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाएं।
भोजन में फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और अन्य फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें।
बच्चे को नियमित समय पर टॉयलेट जाने की आदत डालें।
स्क्रीन टाइम सीमित रखें और खाने के समय मोबाइल या टीवी से दूरी बनाए रखें।
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
यदि बच्चे को लगातार कई दिनों तक कब्ज बनी रहे, मल त्याग के दौरान तेज दर्द हो, मल में खून दिखाई दे, बार-बार पेट दर्द हो या उल्टी जैसी समस्या होने लगे, तो बिना देरी किए बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लें।
मोबाइल या स्क्रीन अपने आप कब्ज नहीं पैदा करते, लेकिन लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठना, कम शारीरिक गतिविधि, पानी कम पीना और टॉयलेट की इच्छा को रोकना जैसी आदतें कब्ज का खतरा बढ़ा सकती हैं। इसलिए बच्चों के लिए संतुलित दिनचर्या, पौष्टिक आहार और सीमित स्क्रीन टाइम स्वस्थ पाचन के लिए बेहद जरूरी है।
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