सर्वेश्वरदयाल सक्सेना: डूबते आदमी का जल से ऊपर उठा यह हाथ

सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की चर्चित रचनाओं में 'पागल कुत्तों का मसीहा', 'खूंटियों पर टंगे लोग', 'कुछ रंग कुछ गंध', 'लड़ाई', 'कच्ची सड़क', 'काठ की घंटियां' शामिल हैं. कविता संग्रह 'खूंटियों पर टंगे लोग' के लिए सर्वेश्वर दयाल सक्सेना को साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया. आईए पढ़ते हैं उनके द्वारा लिखी हुई कविता "डूबते आदमी का जल से ऊपर उठा यह हाथ"-
डूबते आदमी का
जल से ऊपर उठा यह हाथ
फिर-फिर शून्य को पकड़ता
मरे हाथ -
तुमने रचा।
हथकड़ियाँ पहनाने के लिए
अब भी है यह बचा।
इसे शुमार कर लो उस गिनती में
जिसे तुम भूलने जा रहे हो।
नित नई चट्टान तोड़कर
उगते पेड़-सा यह हाथ,
सख़्त धरती की परतें फोड़कर
निकली घास की पत्ती-सा यह हाथ,
निरंतर मेरे साथ -
जिसके इशारे पर
पानी में पड़ी लाश-सा
तुम फूलते जा रहे हो।
इसे शुमार कर लो उस गिनती में
जिसे तुम भूलते जा रहे हो।
अकड़ी हैं उँगलियाँ-शाखाएँ
इन पर चिड़ियों से कहो
आएँ, गाएँ
पर फैलाएँ।
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